लद्दाख के उप राज्यपाल आरके माथुर ने कहा, प्रदेश में बच्चों को लद्दाख की स्थानीय भाषाओं में पढ़ाया जाएगा। प्रशासन की ओर से लद्दाखी शब्दकोष बनाया जा रहा है। इसमें 25 हजार शब्द, एक हजार लोक गीत और 4500 लेख शामिल किए जा रहे हैं। लद्दाख के समृद्ध साहित्य और संस्कृति को स्कूली बच्चों तक पहुंचाया जाएगा। इस लक्ष्य को हासिल करने में साहित्यिक लोगों की बड़ी भूमिका होगी। एलजी लद्दाख कला, संस्कृति और भाषा अकादमी की ओर से आयोजित साहित्य सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा, दूसरे प्रदेशों के लोगों को लगता है कि लद्दाख बहुत दूरदराज का क्षेत्र है, जबकि यहां का साहित्य और संस्कृति बहुत पुरानी है। प्रदेश में 10 हजार साल पुराने पेट्रोग्लिफ (पत्थरों पर उकेरी गईं कृतियां) मिले हैं। ऐसे में हमें मिलकर समाज और युवाओं को इस समृद्ध विरासत से जोड़ना होगा। एलजी ने कहा, युवाओं को अपनी पहचान, संस्कृति और समृद्ध विरासत में भरोसा रखना होगा। इसमें लेह और कारगिल की स्वायत्त परिषदों व पंचायतों को भूमिका निभानी होगी।
...ताकि सोशल मीडिया न डाल पाए असर
एलजी ने कहा, हमें युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से इस कदर जोड़ना है कि उस पर सोशल मीडिया संस्कृति प्रतिकूल प्रभाव न डाल सके। लद्दाखी साहित्य और पुस्तकों को स्थानीय पुस्तकालयों में उपलब्ध कराने से यह लक्ष्य हासिल किया जाएगा।