सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील चलाने और रिकार्ड संभालने में आईटी शिक्षकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आरईटी शिक्षकों का कहना है कि स्कूल में उनका ज्यादातर समय मिड-डे-मील को बनवाने व वितरित करने में ही लग जाता है।
उनकी मांग है कि मिड-डे-मील बनाने व वितरित करने की जिम्मेवारी सरकार किसी एजेंसी को सौंप दे, जिससे की शिक्षक अपना समय व ध्यान विद्यार्थियों को पढ़ाने में लगा सके। यह कहना है कि जेएंडके आरईटी टीचर फोरम के जम्मू संभाग के प्रधान राजेश सिंह का।
राजेश सिंह ने बताया कि जम्मू संभाग के दूर दराज ग्रामीण इलाकों में स्थित ज्यादातर सरकारी प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में आरईटी शिक्षक नियुक्त किए गए हैं। इन शिक्षकों को विद्यार्थियों को पढ़ाने के साथ मिड-डे-मील बनवाने व विद्यार्थियों में वितरित करने की भी जिम्मेवारी सौंपी गई है।
मिड-डे-मील के रिकार्ड को बनाना और शिक्षा विभाग के अधिकारियों तक पहुंचाना भी आरईटी शिक्षकों का काम है। यह सारे काम करने में आरईटी शिक्षकों का हर रोज घंटों का समय लगता है। इस दौरान वे स्कूल में विद्यार्थियों को शिक्षा नहीं प्रदान कर पाते हैं।
मिड-डे-मील बनाने में अगर कोई कमी रह जाती है तो भी उनको ही अधिकारियों को जवाब देना पड़ता है। इसी कारण उनका ज्यादा ध्यान मिड-डे-मील बनाने में ही रहता है। इसलिए उनकी शिक्षा विभाग व राज्य सरकार से मांग है कि यह जिम्मेवारी किसी एजेंसी को दी जाए।
मिड-डे-मीन बनाकर विद्यार्थियों को दे और आरईटी शिक्षक विद्यार्थियों को पढ़ाने अपना ज्यादा समय लगाएं। इससे विद्यार्थियों को भी लाभ मिलेगा और वह गुणवत्ता भरी शिक्षा भी हासिल कर सकेंगे।