एलओसी के पास एक गांव में सन्नाटा है। तमाम घर खाली हैं। युवाओं की उदास सी हलचल नजर आती है जो मवेशियों को चारा डालने या फिर खेत में बर्बाद फसल की कटाई के लिए जोखिम उठा रहे हैं। एलओसी पार से धमाके की आवाज होती है तो 25 सेकेंड के भीतर सभी सुरक्षित स्थान को भागते हैं। सुरक्षित ओट न मिले तो जहां हैं वहीं पर लेटकर जान बचाते हैं।
पलांवाला सेक्टर में पाकिस्तान की तीन पोस्टों से होने वाली गोलाबारी की रेंज वाले छन्न दवानो गांव की जिंदगी रोज इसी जोखिम में बीत रही है । गांव के युवा बहादुर सिंह, दिलावर सिंह और रविंदर सिंह बताते हैं कि 42 कुनबों वाले गांव में एक भी घर पूरे परिवार के साथ नहीं रह रहा।
बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सुरक्षित स्थानों को जा चुके हैं। बुधवार को भीषण गोलाबारी हुई थी। इससे पहले भी रुक रुक कर गोले बरस रहे हैं। घर के कुछ युवाओं को ही यहां आकर माल मवेशियों और फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है।