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यूपी का एक वेल्डर कश्मीर में कैसे बन गया लश्कर का आतंकी?

Tue, 11 Jul 2017 10:49 AM IST
बृजेश कुमार सिंह/जम्मू
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घाटी में आतंक के यूपी कनेक्शन के खुलासे से सुरक्षा एजेंसियों में खलबली मची हुई है। कश्मीरी आतंकियों के गैर कश्मीरियों से आतंकवादी घटनाओं के सिलसिले में गठजोड़ का खुलासा होने से सुरक्षा एजेंसियां सकते में हैं। खासकर लश्कर जैसे कुख्यात आतंकी संगठनों से गैर कश्मीरियों (हिंदू) के संपर्क में आने को सुरक्षा एजेंसियां गंभीर खतरा मान रही हैं।
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अब पूरी घाटी में इस प्रकार के लश्कर के माड्यूल का पता लगाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है। आईजी कश्मीर मुनीर खान का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। इस प्रकार के माड्यूल का पता लगाने के लिए सभी जिलों को सतर्क कर दिया गया है।
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घाटी में वेल्डर का काम करता था आदिल

सुरक्षा एजेंसियों को पकडे़ गए संदीप कुमार शर्मा उर्फ आदिल से पूछताछ में पता चला कि वह गर्मी के दिनों में घाटी में वेल्डिंग का काम करता था। सर्दियों में काम के सिलसिले में घाटी से बाहर जाता था। खासकर पंजाब के पटियाला में। पटियाला में ही उसकी मुलाकात कुलगाम के शाहिद अहमद से हुई। यहां उन्होंने कश्मीर में हिंसा की आड़ में बैंक लूट की योजना  बनाई। इसमें कुलगाम के ही दो युवकों को साथी बनाया। सभी कुलगाम के वानपोह इलाके में एक मकान किराए पर लेकर रहते थे।

इस दौरान उन्होंने बैंक लूट की घटनाओं को अंजाम दिया। धीरे-धीरे इनकी पहचान लश्कर के आतंकी अशकूर अहमद से हुई और फिर संदीप बशीर लश्करी के संपर्क में आया। लश्कर ने इनका इस्तेमाल बैंक लूट की घटनाओं के साथ ही आतंकी हमले में भी करना शुरू कर दिया। लूट की राशि का बंटवारा होता था। एक जुलाई को मुठभेड़ के  दौरान जिस घर में लश्करी था उसी से गैर कश्मीरी युवक के पकड़े जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच पड़ताल शुरू की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
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चकमा देने के लिए बदला नाम

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि लश्कर ने सुरक्षा बलों को चकमा देने के लिए ही इस प्रकार के माड्यूल तैयार किए हैं ताकि किसी को शक न होने पाए। अपराधियों को अपने साथ जोड़ने की लश्कर की साजिश से सुरक्षा बलों को आने वाले समय में तगड़ी चुनौती मिल सकती है। 

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि सुरक्षा बलों को चकमा देने के लिए वह अपने दोनों नाम का इस्तेमाल करता था। चकमा देने के लिए संदीप ने अपना नाम बदलकर आदिल रखा था, ताकि न तो स्थानीय लोगों को किसी प्रकार का शक हो और न ही सुरक्षा एजेंसियों को। इसके साथ ही आतंकियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने में संदीप शर्मा नाम के इस्तेमाल से सुरक्षा बलों को शक नहीं रह जाता
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