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नशे से आजादी की कहानी: मां-बेटी और दंपती ने जीती नई जिंदगी; 220 लोग छोड़ चुके हैं नशे की लत

Sun, 16 Mar 2025 12:44 PM IST
निकिता गुप्ता गौरव रावत अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

नशामुक्ति केंद्र में इलाज के लिए पहुंचे 950 लोगों में से 220 ने अपनी नशे की लत को छोड़कर खुशहाल जीवन जीना शुरू किया, जिनमें मां-बेटी और दंपती भी शामिल हैं।

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डॉ राकेश बनाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नशे से उजड़ते परिवार, बिखरती गृहस्थी, थमती सांसों के किस्से खूब सुने होंगे। पढ़े होंगे। पर, नाउम्मीदी से भरे ऐसे किस्से-कहानियों के बीच उम्मीद की मशालें भी हैं। कई ऐसे लोग हैं जो दृढ़ इच्छाशक्ति की बदौलत नशे के चंगुल से आजाद हुए हैं। शहर के राजकीय मनोरोग अस्पताल के नशामुक्ति केंद्र में बीते एक साल में 950 लोग इलाज के लिए पहुंचे हैं। इनमें से 220 लोग पूरी तरह से इस आदत को छोड़कर खुशहाल जीवन जी रहे हैं। इनमें एक साथ नशे की लती बनीं मां-बेटी, दंपती भी शामिल हैं।

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नशे पर जीत के ये दो उदाहरण
केस-1 : इच्छाशक्ति की बदौलत ड्रग्स की लत से आजाद हुईं मां-बेटीअस्पताल में इलाज के लिए मां-बेटी भी पहुंचीं। दोनों कब ड्रग्स की लत का शिकार हुईं परिवार को भी पता नहीं चला। पर, एक बात अच्छी थी कि दोनों इस लत से आजाद होना चाहती थीं।

आखिर वे खुद अस्पताल तक पहुंचीं। परिवार के अन्य सदस्य भी उनके साथ खड़े रहे। डॉक्टरों का कहना है कि सबसे बड़ी बात थी कि दोनों की इच्छाशक्ति, जो कमाल की थी। बाकी का काम काउंसलिंग और दवाओं ने किया। आज वे ड्रग्स की लत से आजाद और खुशहाल जिंदगी जी रही हैं।

केस-2 : पति-पत्नी दोनों करते थे नशा अस्पताल पहुंचे तो लत छूट गईशहर के ही एक इलाके के रहने वाले पति-पत्नी चिट्टे के लती थे। उनकी गृहस्थी तबाह होने की कगार पर थी। डॉक्टरों के मुताबिक पति के एक मित्र ने उन्हें इस लत को छोड़ने के लिए प्रेरित किया।

परिवार के सदस्य भी उन्हें प्रेरित करते। आखिर ये प्रेरणा रंग लाई और वे अस्पताल के नशामुक्ति केंद्र आने को रजामंद हो गए। डॉक्टरों के मुताबिक सेंटर में इलाज और काउंसलिंग के बाद उनका जीवन बदल गया। आज वे फिर से खुशहाल जीवन जीने लगे हैं।
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बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक पहुंच रहे इलाज कराने
सरकारी मनोरोग अस्पताल के सहायक प्रोफेसर डाॅ. राकेश बनाल बताते हैं कि नशे की लत की भयावह स्थिति है। हमारे पास ऐसे मामले सामने आते हैं जिनमें 12 साल के बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इसकी शामिल होते हैं। इनमें उच्च शिक्षा प्राप्त उच्च वर्ग के लोग भी शामिल हैं।

पर, सुखद यह है कि लत के शिकार हर आयु वर्ग के लोग इलाज के लिए अस्पताल आ रहे हैं। इससे भी बड़ी बात है कि उनमें लत को छोड़ने की बेचैनी दिख रही है। अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि करीब 220 से ज्यादा लोग नशा छोड़ कर खुशहाल जीवन जी रहे हैं। 

जो चाहें इस लत को छोड़ना, सेंटर में मिलेगी सारी सुविधा 
डॉ. राकेश बनाल कहते हैं, जो भी नशे की लत छोड़ना चाहते हैं, वे अस्पताल आएं। हम उनकी पहचान गुप्त रखते हैं। जो मरीज गंभीर लत से पीड़ित होते हैं, उन्हें भर्ती भी किया जाता है। ऐसे लोगों को पहले ऐसी दवाएं दी जातीं है, जिससे उन्हें लत को छोड़ने में कोई तकलीफ नहीं होती। इसके बाद उन्हें नशा छुड़ाने की मुख्य दवा दी जाती है। इसके अलावा जो इंजेक्शन से नशे की डोज लेते हैं, उनका इलाज एड्स कंट्रोल सोसाइटी की देखरेख में किया जाता है।2024 में शुरू हुआ था नशामुक्ति केंद्र

डॉ. राकेश बनाल बताते हैं कि भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की योजना के तहत साल 2024 की शुरुआत में ही एडिक्शन ट्रीटमेंट फेसिलिटीज सेंटर खोला गया। गृहमंत्री अमित शाह ने वर्चुअल माध्यम से इसका शुभारंभ किया था।
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