बच्चों और महिलाओं के लिए 11 किस्म के टीके
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत बच्चों और गर्भवती महिलाओं को 11 किस्म का टीकाकरण और मौखिक वैक्सीन दी जा रही है। इस साल 0-1 साल के 197460 नवजात को वैक्सीनेशन करने का लक्ष्य रखा गया है। आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, पूर्णतः वैक्सीनेटेड बच्चों का प्रतिशत बढ़कर 96.5 हो गया है।
प्रदेश में राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार पोलियो, हेपेटाइटिस, टीबी, गर्भवती महिलाओं और बच्चों में टेटनस, काली खांसी, डिप्थीरिया (गलघोठू), डायरिया (रोटा वायरस के कारण दस्त), निमोनिया, दिमागी बुखार, खसरा, मीसल्स रूबेला, रात के अंधापन से बचाव के लिए विटामिन ए की वैक्सीन दी जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के सभी उपकेंद्र स्तर तक ये वैक्सीन मुफ्त में उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
रोहिग्याओं में टीकाकरण को लेकर भ्रांतियां
जम्मू कश्मीर में एक विशेष समुदाय और रोहिंग्याओं में टीकाकरण को लेकर चुनौती बनी हुई है। इस समुदाय की आबादी में टीकाकरण को लेकर विभिन्न भ्रांतियां हैं। समुदाय के लोगों का मानना है कि टीकाकरण के बाद उनके बच्चों के सिर पर तेज बुखार, पोलियो, कमजोरी आदि की शिकायत हो जाती है। इस आबादी को कवर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें उन तक पहुंच कर टीकाकरण के बेहतर प्रभाव के बारे में जागरूक करती है।
यूविन प्लेटफार्म के जरिए देश में कहीं भी जाकर करा सकते हैं टीकाकरणडिजिटल प्लेटफार्म से देश के किसी भी हिस्से में जाकर बच्चों का टीकाकरण करवाया जा सकता है। जम्मू कश्मीर में कोविड में कोविन प्लेटफार्म के बाद टीकाकरण के लिए यूविन प्लेटफार्म का प्रयोग किया जा रहा है इसके तहत बच्चों का डिजिटल जानकारी एक निर्धारित पोर्टल में डाली जाती है। इसके बाद अगर बच्चा किसी दूसरे राज्य में गया है तो संबंधित पोर्टल के तहत उसका विवरण वहां देखकर टीकाकरण किया जाता है। इसमें टीकाकरण का डिजिटल प्रमाण पत्र भी डाउनलोड किया जा सकता है।