अमरनाथ यात्रा में वर्ष 1930 में बालटाल-अमरनाथ गुफा और पहलगाम-गुफा तक पत्थरों को हटाकर रास्ता बनाया था। हालांकि, उस समय जम्मू शहर से होकर ही श्रद्धालु बालटाल और पहलगाम के रास्ते से शिवलिंग के दर्शन करने जाते थे। तब जम्मू शहर भीड़भाड़ वाला इलाका नहीं था। अधिकांश जगह शहर में खाली थीं। इसलिए यहां श्रद्धालु खुली जगहों पर तंबुओं में आश्रय लेते थे। समूह में चलकर अमरनाथ गुफा तक पहुंचते थे। इसका खुलासा 1930 में तैयार किए वीडियो के माध्यम से हुआ है।
उस समय अमरनाथ गुफा जहां पर पवित्र शिवलिंग है, जगह खाली होती थी। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी कर किए जाते थे। 1930 से लेकर अब तक यात्रा में काफी बदलाव आ चुका है। लोग अब जम्मू से आधार शिविर से पहलगाम तक बस या अन्य वाहनों की सहायता से पहुंचते हैं। इसके बाद पैदल अमरनाथ गुफा तक पहुंचते। लेकिन, 1930 या इससे पहले लोग जम्मू से अमरनाथ गुफा तक रुक-रुक पैदल पहुंचते थे। अब लोग हेलीकाप्टर सुविधा का लाभ भी लेते हैं।