प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद बातचीत में भावुक हुईं महबूबा मुफ्ती ने कहा आज जो बच्चे पत्थर बरसा रहे हैं, यही बच्चे मेरे साथ मेरी ढाल बनकर चलते रहे हैं। ये मुझे बाजी-बाजी कहकर पुकारते थे।
जहां सुरक्षा बलों का साथ नहीं मिलता था, ये बच्चे दूर जंगलों तक उनकी ढाल बनकर साथ चलते रहे। मुझे उनसे शिकायत हो सकती है, वे मुझसे झगड़ा कर सकते हैं।
यह आपसी रिश्ते की बात है, लेकिन हल के बजाय हिंसा चाहने वाले इन्हीं बच्चों को बहका रहे हैं। महबूबा ने कहा कि हिंसा करने वाले बच्चों को आगे कर देते हैं। उनसे कहा जाता है आर्मी कैंप पर हमला करो। मारे गए तो वे शहीद कहलाएंगे। आजादी मिलेगी।
कसूर इन बच्चों का नहीं, उनका इस्तेमाल करने वालों का है। महबूबा ने कहा पीडीपी-भाजपा की गठबंधन सरकार एजेंडा आफ अलायंस पर ठीक से काम भी नहीं कर पाई और ये मसला बन गया। किसी मुद्दे पर प्रदर्शन करना है तो करें लेकिन वह शांतिपूर्ण होना चाहिए।