तीस इंचार्ज असिस्टेंट इंजीनियर को पदोन्नत कर इंचार्ज असिस्टेंट एक्जीक्यूटिव इंजीनियर बनाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस डीएस ठाकुर ने आदेश पर रोक लगा दी है। याचिकाकर्ता के वकील रवि अबरोल और निजी प्रतिवादी के वकील एसके शुक्ला की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस आदेश पर रोक लगाने का आदेश दिया।
जस्टिस ने पाया कि इस मामले में दायर याचिका के पहले राउंड की सुनवाई के बाद अदालत ने आदेश दिया था कि प्रमोशन के तमाम दावेदारों की डीपीसी आयोजित की जाए और नियमों और ठोस आधार पर प्रमोशन किया जाए। उस याचिका में याचिकाकर्ता की शिकायत थी कि उनका जूनियर होने के बावजूद पुरुषोत्तम मन्हास को इंचार्ज असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर प्रमोशन दे दिया गया।
इसके बाद छह दिसंबर 2013 को आयुक्त सचिव ने आदेश जारी कर याचिकाकर्ता को भी इंचार्ज असिस्टेंट इंजीनियर (सिविल) के पद पर पदोन्नत किया था। इस बार भी जारी आदेश को चुनौती दी गई। जस्टिस धीर सिंह ठाकुर ने प्रतिवादी को नोटिस जारी करते हुए अगली तिथि पर बेंच के समक्ष अपना पक्ष रखें।
साथ ही छह दिसंबर 2013 और सात अगस्त 2001 के आदेश पर तब तक अदालत ने रोक लगा दी। साथ ही आयुक्त सचिव (पीएचई/आईएंडएफसी) को चार सितंबर 2012 के आदेश पर उठाए गए कदम की अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा। मामले की अगली तिथि तक अदालत ने रिपोर्ट मांगी है।