संघ लोक सेवा आयोग की ओर से सिविल सर्विसेज 2014 के जारी परिणाम में रियासत के युवाओं का जलवा रहा। थन्ना मंडी के गांव कलस के असिस्टेंट लाइनमैन के बेटे बसीर उल हक ने 46वां स्थान हासिल करने का गौरव पाया, जबकि बिश्नाह की प्रयती शर्मा ने अपने पहले प्रयास में ही 136वां स्थान हासिल किया।
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कश्मीर घाटी के अफाक गिरि (457) और मेंढर निवासी चौधरी मोहम्मद यासिन (459) ने भी प्रतिष्ठित परीक्षा में कामयाबी हासिल की। कश्मीर घाटी की ही दीबा फरहत (553) और अतहर आमिर उल शफी (560) ने भी रियासत का नाम रोशन किया। उत्तर कश्मीर के कुपवाड़ा जिले की रूवेदा ने सिविल सर्विसेज में दूसरी बार सफल होने का गौरव हासिल किया।
इससे पहले 2013 में सिविल सर्विसेज में कामयाब होने वाली जम्मू-कश्मीर की पहली महिला बनने की उपलब्धि हासिल की थी। वर्तमान में वह दक्षिण भारत में आईपीएस के रूप में तैनात हैं। पुंछ के दूर दराज इलाके गांव कलई में स्कूली शिक्षा पाने के बाद माता पिता के साथ जम्मू के बठिंडी इलाके में आकर बसने वाले इरफान हाफिज ने दूसरे प्रयास में सिविल सर्विसेज में कामयाबी हासिल की।
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इससे बेहतर की उम्मीद थी: प्रयती
पहले ही प्रयास में सिविल सर्विसेज में 136वां रैंक पाने के बावजूद बिश्नाह की प्रयती शर्मा संतुष्ट नहीं हैं। प्रयती ने अमर उजाला से बातचीत में कहा, ‘मेरा इंटरव्यू अच्छा हुआ था और उम्मीद थी कि इससे अच्छा रैंक मिलेगा, लेकिन कम रैंक आया।’ प्रयती ने विदेश सेवा और पुलिस सेवा को छोड़ राजस्व सेवा को प्राथमिकता दी है।
प्रयती के अनुसार उनकी पहली प्राथमिकता आईएएस है और दूसरी राजस्व सेवा। बिश्नाह जैसे छोटे शहर में रहने वाली प्रयती के अनुसार अब उसका मुख्य उद्देश्य आम लोगों की सेवा करना है। हार्टीकल्चर विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जगदीश शर्मा की बेटी प्रयती का कहना है कि उसने मात्र एक साल की तैयारी में यह उपलब्धि हासिल की।
वर्ष 2008 में गांधी नगर स्थित कान्वेंट स्कूल से 12वीं पास करने के बाद प्रयती ने गवर्नमेंट वूमेन कालेज से बीएससी की और तीसरा स्थान पाया। वर्ष 2013 में उसने जम्मू यूनिवर्सिटी से एमएससी की और गोल्ड मैडल पाया। एमएससी करने के बाद दिल्ली में मेन एग्जाम की तैयारी की। अपनी उपलब्धि का श्रेय प्रयती परिवार को देती है, जिन्होंने उनके सपनों को पूरा करने के लिए हर तरह से प्रोत्साहन दिया।
पहले आईपीएस और अब आईएएस बनी रूवेदा
कभी मेडिकल परीक्षा, तो कभी कश्मीर प्रशासनिक सेवा (केएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस)। परीक्षाओं में उतरना और उसमें सफल होना रूवेदा सलाम की आदत सी बन गई है। उत्तर कश्मीर के कुपवाड़ा जिले की रूवेदा ने अब सिविल सर्विसेज के सफल प्रतियोगियों में स्थान बनाकर एक और मुकाम हासिल कर लिया है।
2013 में सिविल सर्विस परीक्षा में कामयाब होने वाली पहली कश्मीरी महिला रूवेदा वर्तमान में दक्षिण भारत में आईपीएस के रूप में तैनात है। पूर्व अनाउंसर की बेटी रूवेदा ने सबसे पहले मेडिकल की परीक्षा पास की। उसके बाद उसने केएएस बनने का गौरव हासिल किया और रियासती में एक सीनियर अफसर के रूप में तैनात रही।
हालांकि उसकी मंजिल यहीं नहीं रुकी और उसने 2013 में आईपीएस बनने का गौरव प्राप्त किया। आईपीएस का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद भी उसने कदम नहीं रोके और आईएएस की तैयारी में जुट गई। इस बार उसने फिर सिविल सर्विसेज में कामयाबी हासिल की, लेकिन उसका रैंक 878 रहा। पिछले बार उन्होंने 820 रैंक हासिल किया था।
असिस्टेंट लाइनमैन के बेटे ने रचा इतिहास
थन्नामंडी तहसील के साथ-साथ पूरे जिले में शनिवार को उस समय खुशी का माहौल बन गया, जब तहसील के दूरदराज व पिछड़े गांव कलस के एक छात्र बसीर-उल-हसन ने सिविल सर्विसेज परीक्षा में सफलता प्राप्त की। दिल्ली के आईआईटी से एमटेक करने वाले बसीर ने तीसरे प्रयास में न सिर्फ सिविल सर्विसेज में कामयाबी हासिल की, बल्कि शीर्ष 50 में स्थान बनाया।
बसीर ने 46वां स्थान हासिल किया है। वर्तमान में दिल्ली में रह रहे हाफिज उर रहमान के बेटे बसीर ने मोबाइल पर अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि बचपन से ही आईएएस करने की इच्छा थी। माता-पिता की दुआ से ही उसने आज मुकाम हासिल किया है। अपनी सफलता का श्रेय खुदा व अपने अभिभावकों के साथ-साथ अपनी लगन व कड़ी मेहनत को दिया।
उसने कहा कि पहले दो बार असफल होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी व मेहनत जारी रखी। आखिर सफलता ने कदम चूम लिए। वहीं आईएएस बसीर ने बताया कि वह अपने जम्मू कश्मीर राज्य व राजोरी जिले के लोगों की सेवा करना चाहते हैं। उन्हें किसी भी राज्य में नौकरी करने में खुशी होगी, लेकिन उनकी प्रथम इच्छा अपने राज्य और जिले की सेवा करना है।
उन्होंने जिले के अन्य विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि वह केवल लगन व मेहनत से पढ़ाई करें, एक दिन सफलता जरूर उनके कदम चूमेगी।
पुंछ के गांव कलई में स्कूली शिक्षा पाने के बाद माता पिता के साथ जम्मू के बठिंडी इलाके में आकर बसने वाले इरफान हाफिज ने दूसरे प्रयास में सिविल सर्विसेज में कामयाबी हासिल कर ली। परिणाम निकलने के समय इरफान दिल्ली में ही था और उसने अपने परिवार को कामयाबी की जानकारी फोन पर दी।
नौवीं तक दूर दराज गांव में शिक्षा पाने वाले इरफान ने जम्मू के लिटिल फ्लावर स्कूल (ग्रेटर कैलाश) में दसवीं में दाखिल लिया। 12वीं की परीक्षा रणबीर हायर सेकेंडरी स्कूल से पास की। उसके बाद हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर स्थित एनआईटी से बी टेक की। पहले प्रयास में असफल होने के बावजूद इरफान ने धैर्य नहीं खोया और लगातार मेहनत से दूसरे प्रयास में कामयाबी हासिल कर ली।
पीडब्ल्यूडी विभाग में इंजीनियर पिता हाफिज उल रहमान और प्लस टू की लेक्चरर मां सरजाना कौशर ने बेटे को उसका लक्ष्य हासिल करने के लिए हर तरह से प्रोत्साहित किया। पिता हाफिज के अनुसार बेटे की कामयाबी ने उनकी मेहनत और सपनों को चार चांद लगा दिए हैं।