पीएमओ में राज्यमंत्री और जम्मू-कश्मीर के कठुआ-उधमपुर से सांसद डॉ. जितेंद्र सिंह ने कैट बेंच के शुभारंभ पर आठ जून को कहा था कि उप राज्यपाल प्रशासन एसआरओ 202 की जल्द समीक्षा करेगा। इसके बाद 10 जून को प्रशासन ने सभी सरकारी विभागों से इस एसआरओ के तहत नियुक्त कर्मचारियों का ब्योरा मांगा था।
डॉ. सिंह ने ट्वीट कर कहा कि उप राज्यपाल ने उन्हें फोन कर जानकारी दी है कि एसआरओ 202 का नई भर्ती के नियमों में जिक्र नहीं होगा। अब तक इसके तहत नियुक्त कर्मचारियों का प्रोबेशन घटाकर दो साल कर दिया गया है। उप राज्यपाल को त्वरित कार्रवाई के लिए बधाई।
विधि आयोग ने 2019 में की थी प्रोबेशन घटाने की सिफारिश
जस्टिस (रिटायर्ड) एमके हंजूरा के नेतृत्व वाले विधि आयोग ने भी एसआरओ 202 में प्रोबेशन अवधि घटाने की सिफारिश की थी। दिसंबर, 2019 को मुख्य सचिव को सौंपी रिपोर्ट में एसआरओ 202 से प्रोबेशन अवधि इस आधार पर घटाने की सिफारिश की थी कि डीओपीटी के गजट में दो साल के प्रोबेशन का उल्लेख है। राज्य पुनर्गठन अधिनियम के लागू हो जाने के बाद जिन कर्मचारियों ने दो वर्ष की प्रोबेशन अवधि पूरी कर ली है, उसे नियमित कर देना चाहिए।
नेशनल कॉन्फ्रेंस समेत कर्मचारी विरोध में उठाते रहे हैं आवाज
एसआरओ 202 के खिलाफ नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) समेत विभिन्न राजनीतिक पार्टियां तथा इसके तहत भर्ती होने वाले युवाओं की ओर से लंबे समय से आवाज उठाई जाती रही है। उनका कहना था कि यह समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत के खिलाफ है। इससे उन्हें काफी आर्थिक नुकसान पड़ रहा है। साथ ही उन पर हमेशा मानसिक दबाव भी बना रहता है।