अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर पार्क में जारी सरस आजीविका मेले में पहुंची महिला उद्यमियों ने सरकार के इस पहल की सराहना की है। उनके अनुसार यह एक अच्छी पहल है जिससे महिलाओं को सशक्त किया जा सकता है।
बता दें कि इस मेले में 16 राज्यों से आई महिला उद्यमियों ने अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई है। और रोजाना इस मेले में लोग ग्रामीण क्षेत्रों के उत्पादों को खरीदने आ रहे हैं। महिलाओं ने खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंची महिलाएं ऐसे मेलों को एक अच्छा प्रयास मान रही हैं उनके उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए। लेकिन उनकी एक शिकायत भी है कि सरकार को मशीनी उत्पादों पर रोक लगाने के लिए प्रयास करने चाहिए। शोपियां की एक महिला उद्यमी तनवीरा शाह जोकि क्रिवल आर्ट से जुडी हुई हैं ने बताया कि सरकार द्वारा जो इस तरह के मेले लगाए जाते हैं इनसे हमें अच्छा मंच मिलता है अपने उत्पादों को बेचने का। हम जो कुछ मेहनत करते हैं उसे यहां प्रदर्शित करते हैं। बारीक कढ़ाई किया हुआ एक वॉल हैंगिंग दिखाते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल पांच हजार का है लेकिन अगर यह कोई बड़ा दुकानदार बेचे तो मुंह मांगे दाम मिलेंगे। मशीनी कढ़ाई सस्ती होने के चलते लोग खरीदते हैं लेकिन हमारी मेहनत से बनाए उत्पाद उन्हें महंगे लगते हैं।
त्रिपुरा से आई स्मृति चकमा ने भी इस मेले के आयोजन का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे मेले अक्सर महिलाओं को सशक्त बनाने में योगदान देते हैं खासकर ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को। हम अपने हाथ से बनाए हुए उत्पाद लेकर यहां आए हैं और अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है लोगों की।
गुजरात के खाटली वर्क को इस मेले में प्रदर्शित करते हुए दीपिका ने कहा कि हमारा सब हाथ से बना हुआ काम होता है। हम देश के हर कोने में ऐसे आयोजनों में जाते हैं जहां अच्छी प्रतिक्रिया मिलती है। ऐसे कार्यक्रम होने चाहिए। लेकिन कुछ ऐसे कदम भी उठाए जाने चाहिए जिससे हाथ की बनी हुई कला को अच्छे दाम मिल सकें।
एक अधिकारी ने कहा कि श्रीनगर में सरस आजीविका मेला एक ऐसा आयोजन है जो विभिन्न राज्यों की ग्रामीण महिला कारीगरों को अपने हस्तनिर्मित उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने के लिए एक मंच प्रदान करता है। यह मेला ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने, उनकी सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने और उन्हें सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ने का अवसर देता है। इस मेले में भारत के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की महिलाएं भाग ले रही हैं और विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प, हथकरघा और स्थानीय उत्पाद बेच रही हैं।