तकरीर के दौरान मीरवाइज उमर फारूक। संवाद
श्रीनगर। मीरवाइज-ए-कश्मीर डॉ. मौलवी मोहम्मद उमर फारूक ने शेख-उल-आलम हजरत शेख नूर-उद-दीन नूरानी को उनके उर्स के अवसर पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने उनके तौहीद, करुणा, सादगी और मानवता की सेवा के शाश्वत संदेश को याद किया।
मीरवाइज ने कहा कि हजरत शेख नूर-उद-दीन नूरानी ने अपनी गहन आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि और काव्यात्मक ज्ञान के माध्यम से लोगों तक उनकी अपनी कश्मीरी भाषा में कुरान का मार्गदर्शन पहुंचाया जिससे इस्लाम का संदेश सभी के लिए सुलभ हो गया और समुदायों के बीच ईश्वर-चेतना, आत्म-शुद्धि (इस्लाह-ए-नफ्स), सहिष्णुता और आपसी सम्मान की संस्कृति का पोषण हुआ।
मीरवाइज ने कहा कि हजरत शेख नूर-उद-दीन नूरानी ने हमें सिखाया कि गरिमा वंश से नहीं बल्कि धार्मिकता से उत्पन्न होती है। सच्चा सुधार आत्म-शुद्धि से शुरू होता है और मानवता की सेवा के माध्यम से पूर्ण होता है। हजरत शेख नूर-उद-दीन नूरानी के अमर श्लोक आज भी कश्मीरी दिलों और घरों को रोशन करते हैं।
मीरवाइज ने कहा कि इंशाअल्लाह वह शुक्रवार 24 अक्तूबर को चरार-ए-शरीफ में एक विशेष प्रवचन देंगे जहां वह शेख-उल-आलम की एकता, नैतिक नवीनीकरण की सार्वभौमिक शिक्षाओं और समकालीन समाज के लिए उनकी स्थायी प्रासंगिकता पर विचार करेंगे। ब्यूरो