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Jammu News: पिछले तीन वर्षों में 4,500 से ज्यादा नशीले पदार्थों के मामले दर्ज, पुलिस ने अभियान तेज किया

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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी और दुरुपयोग के खिलाफ अपने अभियान को और तेज कर दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 से अब तक 4,536 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं और इतनी ही संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने इसे राज्य के सामने खड़ी सबसे गंभीर सामाजिक चुनौतियों में से एक करार दिया है।
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पुलिस ने बताया कि कार्रवाई केवल तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध खेती को भी बड़े पैमाने पर नष्ट किया जा रहा है। अनंतनाग, गांदरबल और बारामुला समेत कई जिलों में पुलिस, आबकारी, राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमों ने जंगली भांग और निजी भूमि पर उगाई गई फसलों को हटाया है।
महत्वपूर्ण बरामदगियां और गिरफ्तारियां
सोपोर में इस साल की शुरुआत में चार तस्करों को गिरफ्तार किया गया, जबकि बडगाम में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने अफीम के भूसे का बड़ा जखीरा जब्त किया, जिसे हाल के महीनों की सबसे बड़ी कार्रवाई बताया गया। हंदवाड़ा में कुख्यात तस्कर फारूक अहमद डार उर्फ “जंगली” को पीआईटी एनडीपीएस अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया।जम्मू में पुलिस ने जून महीने में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार कर उनके पास से 350 ग्राम अफीम बरामद की। श्रीनगर और अन्य जिलों में हाईवे और मुख्य मार्गों पर नशीली दवाओं की खेप रोकने के लिए नाकेबंदी बढ़ाई गई है।
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स्थानीय लोगों का सहयोग अहम
अधिकारियों ने बताया कि कई सफल अभियानों के पीछे ग्रामीणों से मिली सूचना अहम रही। शहरी इलाकों में भी स्थानीय स्तर पर सहयोग से तस्करी पर नकेल कसी गई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि संदेश साफ है नशीले पदार्थों की खेती या व्यापार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
युवाओं पर असर और कानूनी पहलू
पुलिस ने युवाओं में नशे के बढ़ते प्रसार को गंभीर खतरा बताया है। अधिकारियों का कहना है कि आपूर्ति लाइनों को तोड़ने के साथ-साथ जागरूकता और पुनर्वास पर ध्यान देना अनिवार्य है।कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, एनडीपीएस अधिनियम के कड़े प्रावधानों का इस्तेमाल तेज़ी से किया जा रहा है। दोषी पाए जाने पर लंबे कारावास और भारी जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ पुनर्वास कार्यक्रमों को भी और व्यापक बनाने की जरूरत है, ताकि नशे की गिरफ्त में आए लोगों को बाहर निकाला जा सके।
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