उत्पादकों ने फलों की आपूर्ति के लिए आरटीसी वाहनों की तैनाती की मांग की
पुलवामा। परिवहन की भारी कमी से जूझ रहे सेब उत्पादक अब डंपरों के जरिए फलों को घाटी से बाहर भेजने को मजबूर हैं। आमतौर पर निर्माण सामग्री ढोने वाले डंपरों में अब सेब की पेटियां भरी जा रही हैं।
उत्पादकों ने कहा कि यह निर्णय परिवहन वाहनों की भारी कमी को देखते हुए लिया गया है। मुगल रोड पर केवल छह टायर वाले ट्रकों को अनुमति देने के कारण वाहनों की मांग आसमान छू रही है जिससे माल ढुलाई का खर्च कई छोटे किसानों की पहुंच से बाहर हो गया है। कश्मीर का बागवानी क्षेत्र लंबे समय से राजमार्ग बंद होने के कारण प्रभावित हुआ है। उत्पादकों ने चेतावनी दी है कि अगर तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो लाखों परिवारों का भरण-पोषण करने वाली घाटी की सेब अर्थव्यवस्था को इस सीजन में भारी नुकसान होगा। उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
इस मुश्किल घड़ी में हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा है। आमतौर पर रेत और बजरी ढोने के लिए इस्तेमाल होने वाले डंपर अब हमारे फलों को जम्मू ले जा रहे हैं। यह असुरक्षित और अवैज्ञानिक है। हम अपनी उपज को बागों या मंडियों में सड़ने नहीं दे सकते।
- गुलाम नबी, बागवान शोपियां
परिवहन की कमी के कारण दरें तीन गुना बढ़ गई हैं। अगर सरकार हस्तक्षेप नहीं करती है तो हमें भारी नुकसान होगा। सरकार से आग्रह है कि जल्द हस्तक्षेप करे।
- बशीर अहमद, किसान पुलवामा
आरटीसी वाहन हमें बड़ी राहत प्रदान कर सकते हैं। उनकी तैनाती से न केवल दबाव कम होगा बल्कि आसमान छूते माल ढुलाई शुल्क पर भी लगाम लगेगी।
-अब्दुल राशिद, व्यापारी, शोपियां फल मंडी
कोट
सेब नाजुक होते हैं और इस तरह के उबड़-खाबड़ परिवहन से सेब की पेटियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और बाजार मूल्य कम हो जाता है। सरकार को हस्तक्षेप कर उचित परिवहन व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए।
- फारुक अहमद, दक्षिण कश्मीर फल संघ के सदस्य