श्रीनगर। सांसद और नेकां नेता आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने सोमवार को कहा कि सरकार में बैठे लोगों को हमारे उभरते युवाओं की तकलीफ और निराशा कब समझ में आएगी। उन्हें कौन समझाएगा कि यह पूरी युवा पीढ़ी का दम घोंट रही है। वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी में मेरिट वाले छात्रों का मामला भी सरकारी की आंखें नहीं खोल रहा।
रुहुल्ला ने कहा कि पिछले साल उन्होंने छह महीने की कहा था। वे छह महीने एक साल में बदल गए हैं। कुछ हफ्ते पहले बडगाम असेंबली चुनाव से पहले उन्होंने कुछ दिन कहे थे। बिना किसी को बताए कि उन्होंने मामला सुलझाया है या नहीं। वे कुछ दिन अब एक महीने से ज्यादा हो रहे हैं। अब अगर वे भविष्य में कभी इस मामले को सुलझा भी लेते हैं, जो मुझे नहीं लगता कि मुश्किल है तो उनके खोए हुए सालों और पहले से चली गई वैकेंसी की भरपाई कैसे होगी।
क्या यह निजी अहंकार की बात है, क्या इस पूरी पीढ़ी को इसलिए सजा दी जा रही है क्योंकि मैं उनके लिए बोल रहा था। ठीक है मैं एक महीने के लिए खुद को इस मामले से अलग कर लूंगा। स्टूडेंट्स से मिलिए। इस मसले को समझदारी से सुलझाइए, उन्हें अपने साथ लीजिए। मुझे कोसिए और उन्हें मेरे खिलाफ कर दीजिए लेकिन कृपया इस स मसले को सुलझाएं जो उनके कॅरिअर से जुड़ा है।
अगर 20 दिसंबर को इस पार्लियामेंट सेशन के खत्म होने के बाद भी यह मसला नहीं सुलझा तो मैं उनके साथ फिर से बैठूंगा जैसे हमने पिछले दिसंबर में किया था। और इस बार यह सिर्फ एक दिन के लिए नहीं होगा। ब्यूरो