ऑल पार्टीज सिख कोऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक में विभिन्न मुद्दों पर किया मंथन
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक दोनों समुदायों के लोग शांति और सद्भाव से रहें, ताकि चरमपंथी तत्वों का पर्दाफाश हो सके व उन्हें विभिन्न समुदायों के बीच अशांति फैलाने से रोका जा सके। यह अपील ऑल पार्टीज सिख कोऑर्डिनेशन कमेटी (एपीएससीसी) की बैठक के बाद अध्यक्ष जगमोहन सिंह रैना ने की है। बैठक में विभिन्न मुद्दों पर मंथन किया गया।
कश्मीर और जम्मू दोनों संभागों के समिति सदस्यों की संयुक्त बैठक के बाद जारी बयान में उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यकों के साथ सद्भाव से रहना चाहिए। अल्पसंख्यकों की किसी भी समस्या का समाधान बहुसंख्यकों को विश्वास में लेकर ही संभव है। हर समुदाय में चरमपंथी तत्व मौजूद हैं, जिनका पर्दाफाश करना जरूरी है।
चरमपंथी तत्व अपने हित के लिए देश को बदनाम करने और धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को बिगाड़ने पर तुले हुए हैं। समाज में लोगों को आस्था और धर्म से इतर सम्मान मिलना चाहिए। बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ राजनेता अपने स्वार्थ के लिए स्थिति का फायदा उठा रहे हैं। बैठक में एपीएससीसी के वरिष्ठ नेता अजीत सिंह मस्ताना, जयपाल सिंह, सरदार राजिंदर सिंह, सरदार गुरदेव सिंह, जगजीत सिंह सूदन, नवतेज सिंह, डॉ. रेखी, दविंदर सिंह और लखविंदर सिंह मौजूद रहे।
सीएम दूसरे कार्यकाल में भी सिखों की कर रहे अनदेखी
एपीएससीसी के अध्यक्ष ने निराशा व्यक्त की कि निर्धारित प्रक्रियाओं को पूरा करने के बावजूद सिखों को जम्मू और कश्मीर में अल्पसंख्यक के रूप में मान्यता नहीं दी गई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपने दूसरे कार्यकाल में भी सिख समुदाय की समस्याओं की अनदेखी कर रहे हैं। पंजाबी भाषा को मान्यता मिलनी चाहिए, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद यह भाषा गुमनामी में खो गई है।