श्रीनगर लोकसभा सीट पर शुरू से ही दिलचस्प मुकाबले की उम्मीद की जा रही थी। किसी को उम्मीद नहीं थी कि नेशनल कांफ्रेंस के आगा सईद रूहुल्लाह मेहदी एक लाख अस्सी हजार से अधिक अंतर से पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के वहीद पर्रा को पछाड़ेंगे। रूहुल्लाह की जीत के पीछे कई कारण रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा कारण श्रीनगर लोकसभा सीट का कई दशकों से नेकां का गढ़ होना है।
पीढ़ी दर पीढ़ी वोट डालने वाले भी जीत के कारण रहे हैं। इसके अलावा इस सीट पर जो भी शिया वोट थे, वो आगा सईद रूहुल्लाह मेहदी को पड़े। हालांकि श्रीनगर के कई शिया इलाके ऐसे भी थे, जहां सज्जाद गनी लोन के नेतृत्व वाली पीपुल्स कांफ्रेंस का दबदबा उनके शिया नेता इमरान रज़ा अंसारी के चलते भी था। लेकिन पीपुल्स कांफ्रेंस का श्रीनगर से कोई उम्मीदवार नहीं था। ऐसे में उन शिया के भी वोट रूहुल्लाह के खाते में चले गए। एक कारण यह भी रहा कि वहीद पर्रा को उनके इलाकों से वोट पड़ने की जो उम्मीद थी, वो नहीं पड़े। अधिक मतदान प्रतिशत भी कारण माना जा रहा है। उनके अनुसार नेकां ने काफी काम किया है।
28 वर्षों में सबसे अधिक हुआ था मतदान
श्रीनगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र कभी बहिष्कार की राजनीति का गढ़ था। यहां पिछले 28 वर्षों में सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया, क्योंकि 17.48 लाख मतदाताओं में से 36.88 प्रतिशत ने मताधिकार का प्रयोग किया। जम्मू-कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी पीके पोले ने इस सीट पर चुनाव संपन्न होने के बाद कहा, हमारा श्रीनगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में 1989 के बाद दूसरा सबसे अधिक मतदान हुआ है।
शाम 5.00 बजे तक 36 प्रतिशत मतदान हुआ। पीके पोले ने कहा था कि निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक मतदान 1996 में दर्ज किया गया था, जब 40.94 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले थे। 2019 में निर्वाचन क्षेत्र में 14.43 प्रतिशत वोट पड़े। वहीं 2009 और 2014 में यह आंकड़ा लगभग 25 प्रतिशत था। इस सीट पर सुचारू चुनाव के लिए 8500 मतदान कर्मचारियों और 17000 सुरक्षा बल कर्मियों को तैनात किया गया था।
जम्मू कश्मीर की श्रीनगर लोकसभा सीट पर हुए मतदान में वोटों की मतगणना के लिए श्रीनगर की डल झील के किनारे स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसी) निर्धारित किया गया था। और सुचारू मतगणना प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए मतगणना केंद्र के अंदर और बाहर कड़ी सुरक्षा के प्रबंध किये गए थे। सुरक्षा के लिए 3 टियर सुरक्षा कवच रखा गया था जिसमें सीएपीएफ, जम्मू कश्मीर पुलिस और सिक्योरिटी विंग के जवान तैनात किये गए थे।
सुबह करीब 7 बजे से ही एसकेआईसीसी में पोलिंग एजेंट, मीडियाकर्मी, आदि की भीड़ जमा होने लग गई थी। एसकेआईसी के आँगन में एक बड़ा एलईडी टीवी और मीडियाकर्मियों के लिए बैठने की जगह रखी गई थी। और मतगणना के लिए एसकेआईसी में 12 काउंटिंग हॉल और सेंटूर कॉम्प्लेक्स में 6 काउंटिंग हॉल स्थापित किए गए थे, प्रत्येक हॉल में 8 काउंटिंग टेबल थे। और चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार वोटों की गिनती सुबह 8 बजे डाक मतपत्रों से शुरू की गई जिसके बाद ईवीएम में वोटों की गिनती सुबह 8.30 बजे से शुरू हुई।
सुबह से ही नेशनल कांफ्रेंस के आगाह सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने अपने प्रतिद्वंदी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की वहीद पर्रा पर बढ़त बनाई रखी। पहले ही राउंड की घोषणा के दौरान रूहुल्लाह ने वहीद पर करीब पंद्रह हज़ार से अधिक वोटों की बढ़त हासिल कर ली थी जो आखिर तक बरकरार रही। और बीस राउंड के रूहुल्लाह ने करीब 1.8 लाख से अधिक वोटों से जीत हासिल की। इस दौरान सुबह से ही नेकां के पोलिंग एजेंट्स खुश दिखाई दे रहे थे जबकि पीडीपी, अपनी पार्टी अन्य अन्य उम्मीदवारों के एजेंट तनाव में दिखे। इस बीच कई बात एसकेआईसी के बाहर रूहुल्लाह के समर्थक छोटी-छोटी टोलियों में जश्न मनाते दिखे और उनके द्वारा आतिशबाज़ी भी की गई।
गौरतलब है कि अपनी जीत सुनिश्चित होती देख रूहुल्लाह अपने कुछ समर्थकों के साथ खुद गाडी चलाते हुए एसकेआईसी में दाखिल हुए और मीडिया को ''विक्ट्री'' दिखाई। इस दौरान उन्होंने ख़ुशी का इज़हार किया और वोटरों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, "लोगों ने मेरे पर विश्वास जताकर एक ज़िम्मेदारी दी है। लोगों ने यह साबित किया जो मैं समझता हूँ उन्ही जज़्बातों को लोग समझते हैं। अब मेरी ज़िम्मेदारी बनती हैं उनके जज़्बातों को आगे रखना।"