श्रीनगर शहर में शनिवार को 10वें मुहर्रम के मौके पर कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लागू की गई थी। हालातों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए शहर के 6 थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लगाई गई थी।
जिनमें रैनावारी, नौहट्टा, सफकदल, महाराज गंज, खान्यार और माईसुमा शामिल थे। प्रशासन को अंदेशा था कि मुहर्रम के जलूस के दौरान अमन-ओ-कानून की स्थिति भंग हो सकती है इसलिए उनके द्वारा यह कदम उठाए गए थे।
सभी संवेदनशील इलाकों में सुरक्षाबलों के जवानो की तैनाती भारी सं या में की गई थी। और कईं जगहों पर तो सड़कों पर कंटीली तारें भी भिछाई गई थी। इन हालातों के चलते श्रीनगर शहर में आम जन जीवन प्रभावित हुआ।
दुकानें, कारोबारी इदारे, स्कूल, कॉलेज आदि बंद रहे और सड़कों पर भी यातायात न के बारबार देखने को मिला। वहीँ इन पाबंदियों के बावजूद भी कईं जगहों पर शिया समुदाय के लोगों द्वारा मुहर्रम के जलूस निकाले गए।
लाल चौक के आबि गुज़र इलाके से भी एक जलूस निकला लेकिन पुलिस द्वारा उन्हे आगे नहीं बढ़ने दिया गया जिसके बाद यह जलूस प्रदर्शन में बदल गया और युवाओं द्वारा जमकर सरकार विरोधी नारेबाजी की गई।
स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया और कइयों को हिरासत में भी लिया गया। इसके इलावा हवल इलाके में भी प्रदर्शन देखने को मिले।
गौरतलब है कि ईदगाह में स्थित आलम साहिब दरगाह में मीरवाइज मोलवी उमर फारूक को एक धार्मिक सभा को संबोधित करना था लेकिन उन्हे पहले से ही नज़रबंद किया गया था।
जिसको लेकर लोगों में गुस्सा था जिन्होने वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों पर जमकर पत्थर बरसाए जिसके जवाब में पुलिस द्वारा भी आंसू गैस के गोले दागे गए।
इसके इलावा सईद अली शाह गिलानी, मोह मद यासीन मलिक समेत अन्य अलगाववादियों को भी नज़रबंद रखा गया था।