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Jammu News: सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की कमी, छात्रों के माथे पर चिंता की लकीरें

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- कश्मीर घाटी में बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे ग्रामीण इलाकों के स्कूल
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर घाटी के सरकारी विशेषकर ग्रामीण इलाकों के स्कूल बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। एक ही कमरे में कई कक्षाएं लग रही हैं। बच्चों को बैठक के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल रही। छात्रों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। ऐसे में देश का भविष्य कैसे उज्ज्वल होगा यह एक बड़ा सवाल है।
राष्ट्रीय और जम्मू-कश्मीर स्तर पर महत्वाकांक्षी शिक्षा सुधारों के बावजूद सरकारी स्कूलों की स्थिति ठीक नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर सरकार ने केंद्र सरकार की योजनाओं के अनुरूप शिक्षा क्षेत्र में कई सुधार लागू किए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 ने पाठ्यक्रम और शिक्षण पद्धति में महत्वपूर्ण बदलाव लाए हैं जिसका उद्देश्य बुनियादी स्तर पर बच्चों को एक मजबूत आधार प्रदान करना है लेकिन इन पहलों के बावजूद स्कूलों में बुनियादी ढांचे की कमी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के स्कूलों में कई कक्षाएं एक ही कमरे में लग रही हैं। एक से ज्यादा कक्षाओं के छात्रों को एक ही जर्जर कमरे में तंग जगह में बैठना पड़ रहा है।
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बुनियादी ढांचे की कमी से किंडरगार्टन और प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों की पढ़ाई पर ज्यादा असर पड़ रहा है। यह समस्या ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में ज्यादा है। यहां अध्यापक एक से अधिक कक्षाओं के छात्रों को एक ही कमरे में ठूंस देते हैं। कुपवाड़ा जिले का सरकारी गर्ल्स हाई स्कूल अशपोरा इसका एक उदाहरण है। इस स्कूल में छठी से दसवीं तक की कक्षाएं लगती हैं लेकिन कमरे केवल चार ही उपलब्ध हैं। छठी और सातवीं की कक्षाएं एक ही कमरे में लग रही हैं।
एक स्थानीय निवासी बशीर दीन ने कहा कि सरकार इन बुनियादी मुद्दों पर ध्यान ही नहीं देती है। यही कारण है कि माता-पिता अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में कराने के लिए मजबूर होते हैं। सरकारी मिडिल स्कूल बडबुग का हाल भी सरकारी गर्ल्स हाई स्कूल अशपोरा से अलग नहीं है। इस स्कूल में सभी छात्राओं के लिए कोई क्लासरूम ही नहीं है क्योंकि इस स्कूल की छठी, सातवीं और आठवीं की छात्राओं को अशपोरा स्कूल के साथ मिला दिया है। सरकारी मिडिल स्कूल हार्वेथ में किंडरगार्टन से आठवीं कक्षा तक के बच्चे पढ़ते हैं लेकिन स्कूल में केवल तीन ही कमरे हैं।
ग्रामीण स्कूलों में कक्षाओं की अनुपलब्धता इन विद्यालयों को मजबूत बनाने के प्रति सरकार की उदासीनता को उजागर करती है। स्थानीय आबादी ज्यादातर सरकारी स्कूलों पर निर्भर है। ग्रामीण स्कूल सरकारी उपेक्षा के शिकार हैं। नामांकन में लगातार वृद्धि के बावजूद ये स्कूल बुनियादी ढांचे की कमी से जूझ रहे हैं।
अधिकारी सभी जरूरतें दर्शा नहीं पाते, इसलिए कमी बनी रहती है
उत्तर कश्मीर के एक शिक्षा अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि भवन या अन्य सुविधा की आवश्यकता को मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) यूनिफाइड डिस्टि्रक्ट इनफार्मेशन सिस्टम फार एजुकेशन (यूडीआईएसई) पर अपलोड करता है जिसके आधार पर समग्र शिक्षा के तहत धनराशि प्राप्त होती है लेकिन कई बार अधिकारी सभी आवश्यकताओं को दर्शा नहीं पाते हैं जिस कारण स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी रहती है।
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सुविधाओं की आवश्यकता का मूल्यांकन करने के दिए हैं निर्देश
उन्होंने बताया कि अधिकारियों को अपने क्षेत्रों का दौरा कर स्कूलों में भवनों या अन्य सुविधा की आवश्यकता का मूल्यांकन करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके उपरांत धनराशि स्वीकृति के लिए इन जरूरतों को यूडीआईएसई पर अपलोड किया जाएगा। उन्होंने कहा कि धन की कोई कमी नहीं है लेकिन कुछ मामलों में आवश्यकताएं यूडीआईएसई पर दिखाई नहीं देती हैं और मुद्दे लंबित रह जाते हैं।
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