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Jammu News: गांदरबल के निजी स्कूलों पर अत्यधिक दाम पर किताबें बेचने का आरोप

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- शिक्षा विभाग ने शिकायतों को गंभीरता से लिया है और सत्यापन शुरू कर दिया है : डिप्टी सीईओ
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संवाद न्यूज एजेंसी
गांदरबल। मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के विभिन्न इलाकों के अभिभावकों ने निजी स्कूलों के खिलाफ सोमवार को कड़ा विरोध जताया। उन्होंने अत्यधिक दामों पर किताबें बेचने और परिवारों को निर्धारित दुकानों से किताबें खरीदने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया।
इन आरोपों ने नए शैक्षणिक सत्र से पहले चिंता पैदा कर दी है। कई अभिभावकों का दावा है कि स्कूलों के कामकाज को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट सरकारी नियमों के बावजूद उन पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि किताबें कहां से खरीदनी है स्कूल तय कर रहे हैं जिससे परिवारों के पास खास विक्रेताओं से महंगी किताबों के सेट खरीदने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। एक अभिभावक मुश्ताक अहमद ने कहा कि मेरे बच्चे के स्कूल ने हमें एक सूची दी और सख्ती से कहा कि किताबें सिर्फ एक ही दुकान से खरीदें। जब मैंने दूसरी दुकानों पर कीमतों की जांच की तो अंतर चौंकाने वाला था। उसी सेट के लिए कम से कम 500 से 700 ज्यादा। यह शोषण है। हम चाहते हैं कि प्रशासन हस्तक्षेप करे।
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एक अन्य अभिभावक ने कहा कि यह समस्या हर साल दोहराई जाती है। उन्होंने कहा कि हर सत्र में यही कहानी होती है। स्कूल हमें महंगी किताबें, यूनिफॉर्म और यहां तक कि स्टेशनरी भी खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। जब हम इस पर सवाल उठाते हैं तो वे कहते हैं कि यह अनिवार्य है। हमारे जैसे मध्यमवर्गीय परिवारों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है।
अभिभावकों का तर्क है कि यह प्रथा सरकारी नियमों का उल्लंघन करती है जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि स्कूल अभिभावकों को किसी खास दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। कई अभिभावकों ने निजी संस्थानों की मुनाफाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए अधिकारियों से कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए गांदरबल की उप-मुख्य कार्यकारी अधिकारी रुमैसा संगीन ने कहा कि शिक्षा विभाग ने शिकायतों को गंभीरता से लिया है और सत्यापन शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि हमें निदेशालय कार्यालय से स्पष्ट निर्देश मिले हैं। अगर हमें ऐसी रिपोर्ट मिलती है कि पाठ्यपुस्तकें बहुत ज्यादा दामों पर बेची जा रही हैं या अभिभावकों को किसी एक दुकान से किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है तो कार्रवाई की जाएगी।
संगीन ने आगे कहा कि विभाग ने जमीनी स्तर पर जांच सुनिश्चित करने के लिए पहले ही जिला-व्यापी निगरानी प्रणाली स्थापित कर दी है। हमने हर जोन में जोनल-स्तरीय समितियां बनाई हैं जिनमें जेडईओ और क्लस्टर प्रमुख शामिल हैं। ये समितियां शिकायतों की जांच करेंगी, मौके पर निरीक्षण करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि स्कूल सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। किसी भी शिकायत पर चाहे वह ऑनलाइन हो या ऑफलाइन तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
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अभिभावकों ने विभाग की प्रतिक्रिया का किया स्वागत
अभिभावकों ने विभाग की प्रतिक्रिया का स्वागत किया है लेकिन सख्त प्रवर्तन पर जोर दिया है। सफापोरा के एक अभिभावक जावेद अहमद ने कहा कि समितियां अच्छी हैं लेकिन हमें जवाबदेही की जरूरत है। अगर स्कूल दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें दंडित किया जाना चाहिए। वरना हर साल यही होता रहेगा। जिले भर के परिवारों ने अधिकारियों से किताबों की कीमतों को नियंत्रित करने, जबरन खरीदारी रोकने और निजी स्कूलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की है ताकि शिक्षा अभिभावकों पर व्यावसायिक बोझ न बन जाए।
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