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Jammu News: पहलगाम हमले के बाद से खाली पड़े डल झील के हाउसबोट

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श्रीनगर की डल झील में खड़े ​शिकारे। संवाद
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-मालिकों का कहना है कि वे सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं, हाउसबोट में केवल दो प्रतिशत को ही मिल रहे पर्यटक
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। मध्य कश्मीर के श्रीनगर जिले की विश्व प्रसिद्ध डल झील और निगीन झील पर पर्यटकों की हंसी की जगह सन्नाटा छाया हुआ है। कभी कश्मीर की मेहमाननवाजी की शान रहे ये खूबसूरत हाउसबोट अब सुनसान पड़े दिख रहे हैं। इनके मालिक 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से जीवन बिताने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
एक प्रसिद्ध हाउसबोट के मालिक मोहम्मद याकूब का कहना है कि यह उनके जीवन का अब तक का सबसे कठिन दौर है। उन्होंने कहा कि 22 अप्रैल से अब तक मेरी सिर्फ तीन बुकिंग हुई हैं जिससे कुल 4800 रुपये कमाए हैं। उसके बाद कुछ नहीं। 1990 के दशक में भी जब कश्मीर में हालात सबसे ज्यादा खराब थे तब भी हमारे पास कुछ काम था लेकिन इस बार हम पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं।
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उन्होंने बताया कि उनका परिवार बहुत मुश्किल में है। मेरे दो बच्चे हैं और मेरे भाई के दो। हमें उनकी स्कूल फीस भरने और रोजमर्रा के खर्च निकालने में बहुत दिक्कत हो रही है। जो कुछ जमा पूंजी बची हुई थी वो भी धीरे-धीरे खत्म होने के कगार पर है। उन्होंने आगे कहा कि अगर टूरिज्म का रिवाइवल जल्द नहीं हुआ तो भविष्य में स्कूल फीस भरना और दो वक्त की रोटी भी मुश्किल हो जाएगी।
एक अन्य हाउसबोट मालिक वसीम अहमद ने कहा कि हमारे भी बच्चे हैं और परिवार हैं। जब पर्यटक ही नहीं आ रहे, बुकिंग कहां से होगी और कमाई कहां से होगी ? हम कमाएंगे नहीं तो खर्च कहां से पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि हाउसबोट की सालाना मरम्मत महंगी होती है। उन्होंने कहा कि हर हाउसबोट को सिर्फ रखरखाव और सीलिंग पर ही कम से कम एक लाख के करीब सालाना खर्च करने पड़ते हैं। लेकिन इस समय हम मरम्मत तो दूर घर के बुनियादी खर्च भी नहीं चला पा रहे हैं।
वसीम के अनुसार इस स्थिति ने कई परिवारों को मुश्किल में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि हम विलासिता की चीजें नहीं मांग रहे हैं। हम बस इतना चाहते हैं कि फीस भर सकें, अपने बच्चों के लिए किताबें खरीद सकें और अपने परिवारों का पेट भर सकें। अभी तो हम इतना भी नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि सरकार जहां फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा देती है तो हमारे बारे में भी सोचे, जो पर्यटन हितधारक पर्यटन पर संकट की वजह से प्रभावित हुए हैं उन्हें भी मुआवजा मिलना चाहिए।
कश्मीर हाउसबोट ओनर्स एसोसिएशन ने बताया कि संकट पूरे क्षेत्र में फैल रहा है। इसके अध्यक्ष मंजूर अहमद पख्तून ने कहा कि कुल करीब 750 हाउसबोट हैं जिनमें 3,000 से ज्यादा कमरे हैं लेकिन वर्तमान में केवल 50 से 60 में ही बुकिंग है जो करीब दो प्रतिशत ऑक्युपेंसी है। उन्होंने आगे कहा कि कर्मचारियों की छंटनी हो गई है और परिवारों के पास कोई आय नहीं है। सरकार को पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी मुआवजे पर विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा इतना ही डल झील के आसपास शिकारा संचालकों और दुकानदारों ने कहा कि वे भी बुरी तरह प्रभावित हैं।
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कश्मीर के पर्यटन पर कब-कब पड़ी मार

वर्ष 1995 में पहलगाम में विदेशी पर्यटकों का अपहरण कर लिया गया था और उनमें से एक की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद वर्ष 2000 में अमरनाथ यात्रा के दौरान हुए नरसंहार में पहलगाम में कई लोगों की जान चली गई थी। 2017 में अनंतनाग में हुए एक बस पर हुए हमले में आठ अमरनाथ तीर्थ यात्री मारे गए थे और 2025 में पहलगाम में 25 से ज्यादा पर्यटक और एक स्थानीय गाइड मारे गए थे जो हाल के दिनों का सबसे घातक हमला था।
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