जम्मू-कश्मीर में कुछ दिनों से केंद्र सरकार द्वारा एक बड़ा एक्शन देखा जा रहा है जिसके चलते 90 के दशक से सक्रिय ऐसे आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है जो देश छोड़ कर पकिस्तान, पकिस्तान अधिकृत कश्मीर या किसी अन्य देश में रहकर भारत में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार हाल ही में जहां जम्मू संभाग से ऐसे 168 आतंकवादियों की सूची पुलिस को दी गई है जिनकी संपत्ति कुर्क की जाएगी। ऐसे ही सूची कश्मीर के 150 आतंकियों की सूची तैयार की है, जिनमें से कुछ की संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया जारी है। हाल ही में मुश्ताक अहमद जरगर उर्फ मुश्ताक लटरम की संपत्ति कुर्क की गई है, जिसे कंधार आईसी-814 हाईजेक में छुड़वाया गया था। सूत्रों की मानें तो आतंकवादी कमांडर सैयद सलाहुदीन का नाम भी इस सूची में शामिल है, जिसके खिलाफ भी जल्द कार्रवाई की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान के आतंकवादियों का समय अच्छा नहीं चल रहा है। जम्मू-कश्मीर में आतंक फैलाने वाले आकाओं के सामने संकट आ गया है। पाकिस्तान के पास अब पैसों की कमी है। सरकार का खज़ाना खाली हो चुका है और वो कंगाली की ओर बढ़ रही है। लेकिन आतंक फैलाने की उनकी मंशा पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन दिक्कत है कि वह आतंकियों को अब फंड नहीं दे पा रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो इसका तोड़ उन्होंने निकाला है, जिसके तहत उन्होंने जम्मू-कश्मीर के आतंकवादियों से उनकी संपत्ति बेच कर फंड इक्ट्ठा करने को कहा है। इससे वह आतंकी कैंप चलाएंगे। लेकिन आतंकी आकाओं की इस रणनीति का पहले ही तोड़ निकाला जा चुका है। गृह मंत्रालय को इसकी भनक लगते ही 90 के दशक में सक्रिय रहे और पाकिस्तान में रह रहे आतंकियों की संपत्ति को कुर्क करने के लिए एनआईए व अन्य एजेंसियों को निर्देश दिए हैं।
इससे पहले 2020 में भी एमएचए की एक रिपोर्ट बात सामने आई थी कि पाकिस्तान में रह रहे जम्मू-कश्मीर के आतंकियों पर संपत्ति बेचने का दबाव बनाया जा रहा है, ताकि घाटि में आतंकियों को पैसा पहुंचा कर मदद की जा सके। एनआईए और ईडी ने टेरर फंडिंग के मॉड्यूल को काफी नुकसान पहुंचाया है। अब आतंकियों के मंसूबों को भांपते हुए 2023 में रणनीति में कुछ बदलाव करते हुए आतंकवादियों की संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया जारी है।
इस की शुरुआत 31 दिसंबर से हुई जब दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम के लिवर गांव में आतंकी गुलाम नबी खान उर्फ आमिर खान के घर की दीवार को जमींदोज किया गया था। यह गैर कानूनी तौर पर कब्ज़ा कर बनाई गई थी। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार गुलाम नबी खान 90 के दशक में पकिस्तान अतिकृत कश्मीर चला गया था और वहीं से नेटवर्क को चला रहा है। वहीं, पुलवामा के हाजन बाला निवासी आतंकी आशिक अहमद नेंगरू उर्फ अमजद भाई का राजपोरा स्थित मकान को अधिकारियों गिराया है। आशिक जैश आतंकी 2019 के पुलवामा फिदायीन हमले में आरोपी है।
केंद्र सरकार ने आशिक को अप्रैल 2022 में आतंकी घोषित किया था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वह भी पाकिस्तान से ही अपना नेटवर्क चला रहा है। इस वर्ष मार्च के पहले सप्ताह में एनआईए की और से दो बड़ी कार्रवाईयां की गई हैं। इसके तहत अल उमर के चीफ मुश्ताक अहमद जरगर की श्रीनगर में स्थित संपत्ति और उसके बाद बारामुला सोपोर के निवासी बासित रेशी की संपति को कुर्क किया गया है। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार अब हिज्ब सुप्रीमो सैयद सलाहुद्दीन पर भी कार्रवाई करने की तैयारी में है।
कश्मीर सोसाइटी संगठन के अध्यक्ष फारूक रिजु ने कहा कि यह कार्रवाई 1947 से अभी तक किया जाना चहिए, क्योंकि 1947 में यहां छोड़ी गई प्रॉपर्टी (कस्टोडियन) को भी यहां हड़प किया गया है। इसके लिए सरकार की एक स्पष्ट नीति की जरूरत है। कस्टोडियन का पैसा सरकारी काचराई और अन्य जमीनी घोटालों से काफी ज्यादा है। एजेंसियों को सीरियस हो कर कार्रवाई करनी चाहिए। इस बीच हाल ही में जम्मू जोन पुलिस को केंद्र द्वारा 168 ऐसे आतंकवादियों की सूची जारी की है, जिसमें किश्तवाड़ से ही 36 आतंकवादी हैं।
90 के दशक में ही उठाने चाहिए थे ऐसे कदम : वैद
जम्मू कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद का कहना है कि पाकिस्तान में कंगाली है। खाने के लाले पड़े हैं। प्रॉपर्टी अटैच करने से भी आतंकियों पर दबाव पड़ता है। जैसा कि इनका प्लान पैसा इकट्ठा करना था एक तो वह रुक जाएगा और दूसरा उनपर परिवार के सदस्यों की ओर से भी मानसिक दबाव पैदा होता है। इससे स्पष्ट संदेश जाता है कि आप देश के खिलाफ लड़ेंगे, जिहाद चलाएंगे। यहां जैसे शांति से बैठे थे, वहां बैठकर जिहाद चलाएं और करोड़ों कमाएं लेकिन उसके लिए कीमत चुकानी पड़ेगी। यह कदम 90 के दशक में ही उठाना चाहिए था। पता नहीं तब की सरकारों ने ऐसा क्यों नहीं किया।