जम्मू। जम्मू-कश्मीर की सरकार केवल कागजों में खेल ढांचे का विकास कर रही है। यह बात हम नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को सुविधाओं की कमी बयां कर रही है। जम्मू-कश्मीर में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक नहीं है, ऐसे में प्रदेश के एथलीट मिट्टी के ट्रैक पर पर खेलने और प्रशिक्षण लेने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में सवाल है कि मिट्टी के ट्रैक पर प्रशिक्षित हो रहे प्रदेश के धावक आखिर कैसे सिंथेटिक ट्रैक पर खेलने वाले धावकों का मुकाबला कर सकेंगे। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं सिंथेटिक ट्रैक पर होती हैं, जहां खिलाड़ियों की टाइमिंग घटती है, क्योंकि उन्हें सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ने में मुश्किल होती है।
जम्मू यूनिवर्सिटी में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक बनाया जाना था, लेकिन घोषण के दो साल बाद भी कागजों में है। सिंथेटिक ट्रैक के अभाव में खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भी इसका असर पड़ रहा है। प्रदेश के खिलाड़ी बाहरी राज्यों का रुख कर रहे हैं। जम्मू शहर में तो खिलाड़ियों के पास प्रैक्टिस के लिए मैदान ही नहीं है। खिलाड़ी कभी एमए स्टेडियम में प्रैक्टिस करते थे, लेकिन अब वहां पर उन्हें अनुमित नहीं है। ऐसे में सिर्फ प्रतियोगिता के समय ही खिलाड़ियों को प्रैक्टिस करने का मौका मिलता है। जम्मू यूनिवर्सिटी में आयोजित तीन दिवसीय यूटी एथलेटिक चैंनिपयनशिप का समापन रविवार को हुआ। इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों ने कहा कि सरकार सिर्फ बातें और दावे कर कर रही है, सुविधा के नाम पर हमारे पास मैदान तक नहीं है।
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19वीं जेएंडके यूटी एथलेटिक चैंपियनशिप में 100 और 200 मीटर में स्वर्ण पदक जीता है। मैंने तीन बार राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता में भाग लिा है। हमारे पास यहां सिंथेटिक ट्रैक नहीं है, हम मिट्टी पर प्रेक्टिस करते हैं। जब हम सिंथेटिक ट्रैक पर खेलते हैं तो दिक्कत होती है, क्योंकि हम सिंथेटिक ट्रैक पर खेलने के आदी नहीं हैं।
रोहित, धावक, जम्मू
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मैं पुंछ से जम्मू प्रैक्टिस करने आया हूं, लेकिन यहां पर सुविधा नहीं है। मैंने ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी गेम्स में खेला है। यूटी एथलेटिक चैंपिनयशिप में हाई जंप और 200 मीटर में राजत पदक जीता है। यहां एथलीट के लिए कोई सुविधा नहीं है। हाई जंप या लांग जंप के लिए मेट्रेस और स्टार्टर नहीं है।
इफतकार, धावक पुंछ
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कई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में खेला है, लेकिन हमारे प्रदेश जैसी अव्यवस्था कहीं नहीं है। खिलाड़ियों को प्रोत्सहान देने में हमारी सरकारें आगे नहीं आती हैं। हमारे खिलाड़ी बाहरी राज्यों से खेलते हैं, क्योंकि उन्हें यहां पर सुविधा और मंच नहीं मिलता है। सरकार सिर्फ दावे करती है, जमीनी सच्चाई अलग है।
अभय सिंह, बिलावर
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