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'अब पाकिस्तान की गोलाबारी सही नहीं जाती'

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भारत-पाक सीमा से। बैन गांव के  बुजुर्ग दंपत्ति से बात करने पर पाक गोलाबारी का दर्द साफ झलका। विमला देवी कहती हैं कि अब जिंदगी बेमजा हो गई। घर में शादी हो तो डरते-डरते सब कुछ करना पड़ता है।
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क्या पता कब पड़ोसी मुल्क से गोलाबारी शुरू हो जाए और घर छोड़ कर जाना पड़े। पति नत्थू राम शर्मा कहते हैं कि हम रोज-रोज की भागमभाग से तंग आ चुके हैं।

सरकार को चाहिए कि कहीं सुरक्षित जगह पर मकान बना कर दे दें, ताकि जिंदगी के आखिरी दिन आराम से निकाल सकें। दोनों नेकहा कि घर छोड़ कर जाने का मन तो नहीं करता, लेकिन अब यहां रहा भी नहीं जाता।

हर पल उठते-बैठते और घर से बाहर जाते एक ही चिंता लगी रहती है कि ना जाने कब पाकिस्तान से होने वाली गोलाबारी उनकी जिंदगी लील जाए। शिव पाल के घर पर भी पाक गोले ने कहर बरपाया।
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'आधी रात एक गोला आकर रसोई के पास फटा'

शिव पाल ने बताया कि वह लोग सो रहे थे तभी आधी रात एक गोला आकर रसोई के पास फटा। सब चीखने लगे। बाहर आकर देखा तो गोले के छर्रों ने घर की दीवारें छलनी कर दी थीं।

वह तुरंत अपना घर छोड़ कर भागे। आंगन में खड़ी मोटर साइकिल भी इसकी चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गई। यदि गोला पांच फुट और दूर आकर कमरे की छत पर गिरता तो क्या हाल होता।

गांव के लोग गोलाबारी को लेकर चिंतित हैं। लोगों ने मांग करते हुए कहा कि सरकार उनको यहां से सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दे। अब रोज रोज उनसे पाकिस्तान की गोलाबारी सही नहीं जाती।

सरकार को चाहिए कि जिस तरह से कश्मीरी पंडितों को बसाने के लिए जगती में फ्लैट दिए गए हैं, उसी की तर्ज पर गांव के लोगों को कहीं सुरक्षित स्थानों पर फ्लैट दिए जाएं, ताकि वह लोग आराम से अपनी जिंदगी गुजार सकें।

गोलीबारी में चौपट हो रही है पढ़ाई

तीन जनवरी को जब पाकिस्तान सांबा सेक्टर में गोले बरसा रहा था तब ग्यारहवीं कक्षा का छात्र दीपक कुमार  टी 1 की परीक्षा की तैयारी कर रहा था।

अगले दिन परीक्षा देने जाना था, लेकिन सुबह होते ही पाकिस्तान की तरफ से गोलों की बरसात होने लगी। दीपक अपने परिवार के साथ गांव से भागा।

उसकी तरह ही गांव के 15 अन्य विद्यार्थियों की भी परीक्षा थी। कोई भी परीक्षा में शामिल नहीं हो सका। पाकिस्तान ने सांबा सेक्टर के 15 गांवों को निशाना बनाया।

इसकी वजह से गांववासियों को विस्थापित शिविरों में जाना पड़ा। यहां रहने वाले लोगों में सबसे ज्यादा चिंतित विद्यार्थी वर्ग है।

दीपक की ही तरह 11वीं के छात्र राहुल, दसवीं कक्षा के आशु, नौंवी कक्षा के शम्मी ने अमर उजाला को बताया गोलाबारी से वे परीक्षा की सही ढंग से तैयारी नहीं कर पा रहे।
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हाथों की मेहंदी भी नहीं उतरी, छोड़ना पड़ा पिया का घर

चंद दिनों पहले गांव बैन गलाड़ के जिन घरों में शहनाई बजी थी, वहां आज सन्नाटा पसरा है। नई बहू के आने की खुशियों की खुमारी अभी उतरी भी नहीं थी कि सीमा पार से आए गोलों ने लोगों को घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। विवाह वाले घर के बाहर गेट पर अभी भी रंग बिरंगी चुन्नियां टंगी हैं।

पिछले महीने गांव के चार घरों में शादियां हुईं थी। गांव की बहुओं के हाथों की मेहंदी भी अभी नहीं उतरी है। पिछले एक माह से वह परिवार और गांव के रिश्तेदारों से रूबरू हो रहीं थी। लेकिन अब अपने रिश्तेदारों के पास पनाह लिए हुए हैं। गांव के युवक विकास का विवाह शाह ब्लाड़ की युवती अंजू देवी से हुआ।

दो दिन पहले गोलाबारी के कारण वह अपने परिवार के साथ अन्य रिश्तेदार के पास चली गई है। गांव के ही एक अन्य युवक काली दास का विवाह चंग निवासी कोमल शर्मा से हुई। कोमल भी अपने पिया और ससुराल वालों के साथ अब रिश्तेदारों के घर में रहकर गोलाबारी रुकने का इंतजार कर रही है।

गांव की ही बेटी प्रियंका का विवाह पास के गांव दयाला चक में हुआ है। उनका परिवार भी अब दूसरों की शरण में है और प्रियंका अपने परिवार व घर की सलामती को लेकर चिंतित है। परमीत कुमार का विवाह अमृतसर की ज्योति के साथ हुआ है। गोलाबारी के पहले ही वह पत्नी के साथ घूमने निकल गया था। अब परिवार वाले चाहते हैं कि वह अमन शांति होने के बाद ही लौटे।
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