जम्मू कश्मीर को नेपाल में रुक-रुक कर आने वाले भूकंप से कोई खतरा नहीं, क्योंकि नेपाल में आए भूकंप का केंद्र नेपाल से 80 किलोमीटर दूर लामगंज था, जो राज्य से हजारों मील दूर है।
यदि हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा या फिर पाकिस्तान के मुजफ्फरानगर सहित राज्य के उड़ी में भूकंप का केंद्र होता तो तबाही मच सकती थी। इन क्षेत्रों से राज्य को खतरा है।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में जानकारी देते हुए जम्मू विश्वविद्यालय के भौगोलिक विभाग के भू वैज्ञानिक जीएम भट्ट ने बताया कि जब भी कहीं भूकंप का केंद्र बनता है, तो उसकी तीव्रता के हिसाब से साथ लगता इलाका प्रभावित होता है।
नेपाल में आया भूकंप भी ऐसा ही है। यहां 7.9 रिक्टर स्केल की तीव्रता से भूकंप आया। इसकी वजह से इसके आसपास का 300 से 400 किलोमीटर तक का इलाका प्रभावित हुआ।
लेकिन नेपाल जम्मू-कश्मीर से काफी दूर है, इसलिए बेशक वहां रुक -रुक कर भूकंप के झटके लग रहे हों, इसका रियासत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भट्ट ने राज्य की स्थिति के बारे में बताया कि डोडा-किश्तवाड़ में समय-समय पर भूकंप के झटके आते हैं।
नेपाल में कश्मीर के सभी लोग सुरक्षित
रियासत पर भूकंप का खतरा है, जिसका केंद्र राज्य के आसपास ही बनेगा। यह नहीं बताया जा सकता कि यह भूकंप कब आएगा, लेकिन कभी भी आ सकता है। इसका केंद्र पीओके, पाकिस्तान, हिमाचल, श्रीनगर में बन सकता है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2005 में राज्य में आए भूकंप का केंद्र भी पीओके के मुज्जफरानगर में बना था। तब मुज्जफरानगर, श्रीनगर के उड़ी में भारी तबाही मची थी। तब राज्य में 7.6 रिक्टर स्केल तीव्रता मांपी गई थी।
नेपाल के काठमांडू में कश्मीर के करीब दो हजार लोग पूरी तरह से सुरक्षित हैं। सिर्फ दो युवकों के घायल होने की सूचना है। उमर और सज्जाद नाम के दोनों युवकों का काठमांडू के टीचिंग अस्पताल में इलाज चल रहा है।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि श्रीनगर पुलिस द्वारा बनाया गया पुलिस कंट्रोल रूम दिल्ली और काठमांडू के कंट्रोल रूम से लगातार संपर्क में है। काठमांडू एयरपोर्ट के विंग कमांडर रवि शर्मा से वहां फंसे हुए लोग संपर्क कर सकते हैं।