फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लश्कर-ए-इस्लाम का नकाब ओढ़ हिज्ब कर रहा टावरों पर हमले

विज्ञापन
विज्ञापन
कश्मीर में मोबाइल टावरों पर हमले की जिम्मेदारी लेने वाले आतंकी संगठन लश्कर-ए इस्लाम की पहेली से पर्दा उठने लगा है। सुरक्षा एजेंसियां इसे हिज्बुल मुजाहिदीन (हिज्ब) का बदला चेहरा मान रही हैं।
विज्ञापन


हालांकि, सैयद सलाउद्दीन की अगुवाई वाली यूनाइटेड जिहाद काउंसिल इसका दोष भारतीय एजेंसियों पर मढ़ रही है। गौरतलब है कि सलाउद्दीन हज्ब के भी प्रमुख हैं।
   
खुफिया एजेंसियों को मिल रही जानकारी के मुताबिक आतंकियों के गुटों और अलगाववादियों में वर्चस्व की होड़ के कारण हिज्ब ने नया नकाब लगाया है। आतंकियों की बदली रणनीति के बाद अब सुरक्षा एजेंसियां भी रणनीति बदल रही हैं।

इसके मद्देनजर मोबाइल टावरों को अर्द्धसैनिक बलों के परिसरों में शिफ्ट किया जा सकता है। बुधवार को गृहमंत्रालय में इस संवेदनशील मुद्दे पर सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों की समीक्षा बैठक हुई।
विज्ञापन

हिज्ब के खेल का पर्दाफाश

मोबाइल आपरेटरों को सुरक्षा देने के लिए ठोस योजना बनाई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने हिज्ब के खेल का पर्दाफाश कर अलगाववादियों पर भी नकेल की रणनीति बनाई है। इसके तहत कुछ अलगाववादियों पर पीएसए लगाने का दबाव मुफ्ती सरकार पर बढ़ा है।

उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक मसर्रत आलम की रिहाई और बाद में गिरफ्तारी की घटना ने अलगाववादियों में वर्चस्व की होड़ पैदा की है। यासीन मलिक, शब्बीर शाह, मीरवाइज उमर फारूक और सैयद अली शाह गिलानी के गुटों में भारत विरोध की प्रतिस्पर्धा तेज हो गई। इसी क्रम में खुद को ज्यादा जनाधार वाला बताने की कोशिश में पाकिस्तानी झंडे लहराने की होड़ मची।

अलगाववादियों की रैलियों के बाद कुछ आतंकी संगठनों ने भी अपनी मौजूदगी का आभास दिलाना शुरू किया। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक हिजबुल मुजाहिदीन नकाब की ओट में दोहरे खेल को अंजाम दे रहा है।
विज्ञापन

हमलों का पूरा सच

आतंकी संगठनों पर कार्रवाई तेज करने की गृहमंत्रालय की एडवाइजरी के बाद मुफ्ती मोहम्मद की सरकार की भी सक्रियता बढ़ी है। सुरक्षा एजेंसियों और सेना में तालमेल बढ़ाकर आतंकियों की तलाश तेज की जा रहीं हैं।

आतंकी संगठन पहले भी अपना चेहरा बदलकर हमले करते रहे हैं। जुबिन मेहता के कार्यक्रम से पहले लश्कर-ए -तैयबा ने शोहादा ब्रिगेड, अल नसरीन और फरजंदन-ए-मिल्लत का चोला पहन लिया था। दो साल तक लश्कर इन नए संगठनों के नाम से हमलों को अंजाम देता रहा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें