सोनमर्ग में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट ठप, स्थानीय लोग पर्यावरणीय खतरे को लेकर चिंतित
एसडीए सीईओ ने कार्रवाई का दिया आश्वासन
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के सोनमर्ग के सरबल इलाके में वर्ष 2020 में लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से स्थापित बहुप्रचारित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट अपने उद्देश्य को पूरा करने में विफल रहा है। सैकड़ों टन कचरा खुले में जमा हो चुका है। इससे जन स्वास्थ्य व पर्यावरण को खतरा पैदा हो गया है।
सरबल के स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थिति असहनीय हो गई है। इलाके में दुर्गंध फैल रही है जिससे जन स्वास्थ्य और पर्यटन स्थल की नाजुक पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। सोनमर्ग विकास प्राधिकरण (एसडीए) ने होटलों, रेस्टोरेंट और बाजारों से निकलने वाले कचरे के प्रबंधन के उद्देश्य से यह प्लांट स्थापित किया था। इसका उद्देश्य इस लोकप्रिय स्वास्थ्य रिसॉर्ट की स्वच्छता सुनिश्चित करना और पर्यावरण की रक्षा करना था। हालांकि अपनी स्थापना के पांच साल बाद भी यह परियोजना अव्यवस्थित है और इसके बाहर अनुपचारित कचरे के ढेर लगे हुए हैं।
सरबल के एक स्थानीय निवासी सिराज अहमद ने कहा कि हम घुटन भरी परिस्थितियों में जी रहे हैं। अधिकारियों ने इस प्लांट के बारे में बड़े-बड़े दावे किए थे लेकिन हकीकत में यह उपचार स्थल की बजाय कचरा संग्रहण स्थल बन गया है। एसडीए की मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंतशा रशीद ने बताया कि उन्होंने अपनी टीम के साथ स्थिति का आकलन करने के लिए हाल ही में घटनास्थल का दौरा किया। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो उन्होंने मामले की सूचना उच्च अधिकारियों को दे दी है और मौजूदा स्थिति को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशानिर्देशों का संभावित उल्लंघन बताया है।
प्लांट के रखरखाव की जिम्मेदारी सड़क एवं भवन विभाग और मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की संयुक्त रूप से है लेकिन कथित तौर पर दोनों ही अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहे हैं। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ दिनों से संयंत्र की मशीनें खराब पड़ी हैं जिससे अपशिष्ट उपचार प्रक्रिया पूरी तरह से ठप हो गई है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने खुलासा किया कि सोनमर्ग को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाए रखने के लिए एसडीए की ओर से करोड़ों रुपये के निवेश के बावजूद यह सुविधा अप्रभावी बनी हुई है। इस साल इस प्लांट को 370 दिनों की अवधि के लिए 65 लाख रुपये के अनुबंध के तहत आउटसोर्स किया गया था। आउटसोर्सिंग के बावजूद जमीनी हकीकत नहीं बदली है। कचरा अभी भी खुले में पड़ा है जिससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को खतरा है।
सरबल के स्थानीय लोगों ने कहा कि अनुपचारित कचरे के ढेर सोनमर्ग की प्राकृतिक सुंदरता को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यहां हर मौसम में हजारों पर्यटक आते हैं। एक अन्य स्थानीय निवासी ने दुख जताते हुए कहा कि सोनमर्ग का आकर्षण इसके प्राचीन पर्यावरण में निहित है लेकिन अगर अधिकारी कार्रवाई करने में विफल रहे तो यह अपना आकर्षण खो देगा।
पर्यावरणविदों को भी डर है कि अगर इस मुद्दे का जल्द समाधान नहीं किया गया तो इसके दीर्घकालिक परिणाम हो सकते हैं। वे चेतावनी देते हैं कि अनुपचारित कचरा जल स्रोतों को दूषित कर सकता है और उस क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन को बिगाड़ सकता है जो पहले से ही बढ़ते पर्यटकों के कारण दबाव का सामना कर रहा है।
स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि प्लांट की मशीनरी की बिना देरी के मरम्मत की जानी चाहिए और कचरा तुरंत हटाया जाना चाहिए। सोनमर्ग सिर्फ एक पर्यटक आकर्षण ही नहीं बल्कि हमारा घर भी है और इसे साफ-सुथरा रखने का हक है।
इस बीच, एसडीए की सीईओ मंतशा रशीद ने इस मुद्दे को स्वीकार करते हुए बताया कि सोनमर्ग की सुंदरता को बनाए रखने के लिए और कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोनमर्ग हमारा गौरव है और हम इसके आकर्षण को बनाए रखने के लिए कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।