केंद्र में सत्ता बदलने के साथ ही जम्मू कश्मीर के सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के नियम बदल गए हैं। अब प्रोजेक्ट पीपीपी मोड के तहत बनेगा। केंद्र की ओर प्रोजेक्ट के लिए मात्र 23 करोड़ रुपये ही दिए जाएंगे। नगर निगम के उच्चाधिकारियों की ओर से सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के लिए उच्च स्तर पर चर्चा की जा रही है। 70 करोड़ रुपये की लागत बनने वाले इस प्रोजेक्ट की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी बनाई जा रही है।
प्रोजेक्ट को पहले केंद्र की ओर से मंजूरी मिल गई थी, लेकिन कोई फंडिंग नहीं होने के कारण प्रोजेक्ट पर काम नहीं हो सका। इसके बाद सरकार बदली तो हालात बदल गए। पहली वाली मंजूरी रद्द के बराबर हो गई। शहर में से रोजाना 300 मीट्रिक टन कचरा निकलता है, जिसे निगम की ओर से अभी तक तवी नदी से सटी जमीन में ही डंप किया जाता है।
कोट भलवाल में प्रोजेक्ट के लिए जगह आरक्षित रखी है। केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद कई बदलाव के साथ नियम भी बदल गए हैं। अब पीपीपी मोड के तहत प्रोजेक्ट का निर्माण होगा। इसके बाद पीपीपी मोड वाली पार्टी 15 से 18 साल तक प्रोजेक्ट को अपने पास रखेगी। चार मेगावाट बिजली पैदा होगा। कंपोस्ट से अन्य कई चीजें बनेंगी। टाइलें तैयार होगी। नगर निगम कमिश्नर सौजन्य शर्मा के मुताबिक कंसलटेंट हायर कर लिया गया है।
डोर टू डोर कचरा उठाना संभव नहीं
डोर टू डोर कचरा उठाना संभव नहीं है। हालांकि सुप्रीमकोर्ट की हिदायतें भी हैं कि लोगों के घरों से कचरा उठाया जा सके, लेकिन अभी तक ऐसी स्थिति नहीं बन पा रही है कि डोर टू डोर कचरा उठाया जा सके। नगर निगम यूजर्स चार्जेज नहीं मिलने की बात पर अड़ा है। शहर में 15 लाख लोगों की आबादी है।
तवी में डंप किया जा रहा कचरा
मौजूदा समय में नगर निगम की ओर से तवी नदी से सटी 200 कनाल जगह पर कचरा डंप किया जाता है। इससे कुछ जगह पर लापरवाही बरते जाने के कारण कई बार स्थानीय लोगों और नगर निगम मुलाजिमों का विवाद भी होता रहा है।