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जम्मू में सूर्यग्रहण 8.20 बजे होगा शुरू, सूतक काल से ही कई मंदिरों के कपाट रहेंगे बंद

Tue, 24 Dec 2019 05:44 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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सूर्यग्रहण - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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जम्मू में सूर्यग्रहण 26 दिसंबर को सुबह 8.20 बजे शुरू होगा। यह सुबह 10.49 बजे समाप्त होगा। ग्रहण का सूतक काल 25 दिसंबर रात्रि 8 बजे से शुरू होगा। ग्रहण के प्रभाव के चलते सूतक काल से ही कई मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। 
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महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि बालक, वृद्ध और रोगी 26 दिसंबर को सुबह 5 बजे तक अगर कुछ खाना चाहें तो खा सकते हैं। ग्रहण काल में सबसे ज्यादा सावधानी गर्भवती महिलाओं को रखनी चाहिए। इस दौरान वे सबसे ज्यादा संवेदनशील होती हैं और गर्भस्थ शिशु पर ग्रहण काल का विपरीत असर पड़ सकता है। 

घर में रखे पानी में कुशा डाल देनी चाहिए। इससे पानी दूषित नहीं होता है। कुशा न हो तो तुलसी का पौधा शास्त्रों के अनुसार पवित्र माना गया है। वैज्ञानिक रूप से भी यह तर्कसंगत है क्योंकि इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट आसपास मौजूद दूषित कणों को मार देते हैं। इसलिए खाद्य पदार्थ में डालने से उस भोजन पर ग्रहण का असर नहीं होता। 
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बताया कि पाकिस्तान एवं सिंध प्रदेश में आतंकी घटनाओं में वृद्धि होगी। जम्मू-कश्मीर, चीन एवं मुस्लिम राष्ट्रों में राजनीतिक उथल-पुथल होगी। ग्रहण के समय धनु राशि में बुध की युति सूर्य और चंद्रमा से हो रही है जिस कारण इसके अशुभ फल तुरंत दिखाई देंगे।

  • खास बातें
- यह सूर्य ग्रहण दक्षिण भारत में सबसे बेहतर तरीके से देखा जा सकेगा।- ग्रहण के दौरान सूर्य एक चमकदार रिंग की तरह दिखाई देगा।
- सूतक काल 25 दिसंबर की रात 8 बजे से ही शुरू हो जाएगा।
- पूर्ण सूर्यग्रहण 18 माह में एक बार ही दिखाई देता है।
- जब सूर्य ग्रहण चरम पर होता है, तब पृथ्वी पर चंद्रमा की एक गोलाकार छवि बनती है।
- सूर्यग्रहण के वक्त पृथ्वी के ध्रुवों पर चंद्रमा की परछाईं 5000 मील प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है।
- पृथ्वी पर पड़ने वाली परछाईं की अधिकतम चौड़ाई 167 मील हो सकती है, इससे अधिक नहीं हो सकती।
- सूर्यग्रहण के वक्त पृथ्वी पर चंद्रमा की परछाईं पड़ती है, जो 1100 मील प्रति घंटा की रफ्तार से इक्वेटर पर चलती है।
- उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव से केवल आंशिक सूर्य ग्रहण ही दिख सकता है, पूर्ण सूर्य ग्रहण यहां से कभी नहीं दिख सकता है।
 
  • सूर्य ग्रहण का वैज्ञानिक तथ्य
ग्रहण को लेकर कई मिथक हैं लेकिन इसके कई वैज्ञानिक तथ्य भी हैं। सूर्यग्रहण के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि इस अवधि के दौरान पृथ्वी के उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव प्रभावित होते हैं। यह अवधि ऋणात्मक मानी जाती है। ग्रहण के दौरान सूर्य से निगेटिव विकिरण यानी रेडिएशंस निकलती हैं। इसलिए नंगी आंखों से देखने के लिए मना किया जाता है ।
  • क्या हैं ग्रहण से जुड़े मिथक
भारत में तो ग्रहण को लेकर काफी मिथक भी जुड़े हैं। ज्योतिष के अनुसार जहां ग्रहण शुरू होने के पहले ही मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं वहीं गर्भवती महिलाओं और बच्चों को भी इसके सीधे संपर्क में आने की मनाही होती है।
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  • क्यों लगता है सूर्य ग्रहण
ग्रहण एक खगोलीय घटना है। जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं तो ग्रहण लगता है। जब सूर्य और पृथ्वी के बीच जैसे ही चंद्रमा आता है तब इसे सूर्य ग्रहण कहा जाता है। सूर्य ग्रहण तीन तरह का होता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण, आंशिक सूर्य ग्रहण और वलयाकार सूर्य ग्रहण। हिंदू पंचांग के अनुसार ग्रहण की यह घटना हमेशा अमावस्या के दिन ही होती है।

1. पूर्ण सूर्यग्रहण
पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है और इसका प्रकाश पूरी तरह से धरती पर नहीं पहुंच पाता है और पृथ्वी पर अंधकार की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस प्रकार बनने वाला ग्रहण को पूर्ण सूर्यग्रहण कहते हैं।
2. आंशिक
आंशिक सूर्यग्रहण के दौरान चंद्रमा, सूर्य के केवल कुछ भाग को ही अपनी छाया में ले पाता है। इससे सूर्य का कुछ भाग ग्रहण ग्रास में तथा कुछ भाग ग्रहण से अप्रभावित रहता है। इस प्रक्रिया को आंशिक सूर्यग्रहण कहा जाता है।
3. वलय
अंतिम प्रकार का सूर्य ग्रहण "वलय सूर्यग्रहण" के नाम से जाना जाता है। इसमें चंद्रमा सूर्य को इस प्रकार से ढकता है कि सूर्य का केवल मध्य भाग ही छाया क्षेत्र में आता है। सूर्य के बाहर का क्षेत्र प्रकाशित होने के कारण वलय सूर्यग्रहण एक चमकदार अंगूठी के प्रतीत होता है।
  • ग्रहण के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
- ग्रहण के वक्त किसी को भी पूजा पाठ नहीं करना चाहिए।  
- खाने पीनें की चीजें में तुलसी का पत्ता डालकर रख दें।
- ग्रहण के खत्म होने के बाद ही पूरे घर की सफाई करनी चाहिए।
- ग्रहण के समय खाना ना बनाए और ना ही खाएं।
- गर्भवती महिलाओं को सूर्यग्रहण के दौरान खास ध्यान रखना चाहिए।
- ग्रहण के दौरान सिर पर तेल लगाना वर्जित होता है।
- ग्रहण के दौरान वायुमंडल में बैक्टीरिया और संक्रमण का प्रकोप तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे में भोजन करने से संक्रमण अधिक होने की आशंका रहती है। 
- ग्रहण के समय पति और पत्नी को शारीरिक संबंध किसी भी कीमत पर नहीं बनाना चाहिए। इस दौरान यदि गर्भ ठहर गया तो संतान विकलांग तक या मानसिक रूप से विक्षिप्त तक हो सकती है।
- ग्रहण के समय कोई भी शुभ व नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।
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