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Jammu News: स्मार्ट सिटी कंपनी की किताब में खुले घोटाले के पन्ने

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अमर उजाला ब्यूरो
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जम्मू। स्मार्ट सिटी कंपनी की किताब में अब घोटाले के पन्ने खुल रहे हैं। शहर का विकास करने के बजाय संबंधित अधिकारी खुद का विकास कर रहे हैं।। जनसुविधा के लिए लाई परियोजनाएं कागजों में पूरी हो रही हैं। हकीकत में एक पैसे का काम नहीं दिख रहा। ऐसा 2022 में हुआ है, जब शहर में भूमिगत कूड़ेदान की परियोजना के लिए 1.65 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। 60 से ज्यादा भूमिगत कूड़ेदान लगाने का काम जून से शुरू होना था, जिसे आठ माह में हर हाल में पूरा करना था। जमीनी स्तर पर एक फीसदी तक काम नहीं हो पाया, लेकिन जिम्मेदार कंपनी की किताब में साफ-साफ लिखा है कि परियोजना का काम दिसंबर में शुरू हुआ, जिसे फरवरी में खत्म कर लिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि लगभग पौने दो करोड़ कौन डकार गया, क्योंकि कूड़ेदान तो लगे ही नहीं। इसका जवाब फिलहाल किसी भी अधिकारी के पास नहीं है।
अब घपले की भेंट चढ़ी परियोजना से स्वच्छ भारत अभियान की धज्जियां उड़ रही हैं। सड़कों पर गंदगी फैल रही है, जिससे दुकानदारों समेत लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खुले में कचरा डंपिंग साइट में फेंका जा रहा है। इन साइटों को बंद करने के लिए नगर निगम कई बार फैसला ले चुका है, लेकिन वह भी काम कागजों से आगे नहीं बढ़ पाया। दोपहर तक डंपिंग साइट को साफ करने का काम चलता रहता है। शाम पांच बजे फिर से डंपिंग साइट कचरे से लबालब भर जाती है। इसलिए ऐसी जगहों में कूड़ेदान स्थापित होने थे, जहां पर बाजार है या फिर खुले डंपिंग साइट। इससे कचरा सीधा कूड़ेदानों में जाना था और रात को लिफ्ट कर मुख्य कूड़ेदान में फेंकना था।
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गांधी नगर समेत अन्य इलाकों में कूड़ेदान नहीं

स्मार्ट सिटी कंपनी का दावा था कि पैसे मिलने के बाद ठेकेदार को काम अलॉट किया जाएगा। टेंडर करवाए जाएंगे और आठ महीने में लोगों को सुविधा दी जाएगी। मगर उसकी अपनी किताब ने बड़ा घोटाला खोल दिया। परियोजना के तहत सतवारी, कुंजवानी, डिग्याना, विक्रम चौक, गांधी नगर, शास्त्री नगर, बहु प्लाजा, नरवाल, बहु फोर्ट, पुराना शहर, बस स्टैंड, जानीपुर, रूपनगर पलौड़ा समेत सभी 75 वार्डों में भूमिगत कूड़ेदान लगाए जाने थे। इसके लिए बकायदा पिछले साल सर्वे हुआ था।
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प्रतिदिन एकत्रित होता है 400 एमटी कचरा

हर रोज शहर में 400 एमटी कचरा एकत्रित होता है। दो सौ एमटी कचरा तो पॉलिथीन का है। ऑटो के माध्यम से जो कचरा एकत्रित होता है, उसे कचरा संयंत्र केंद्र में भेजा जाता है। इसके बाद डंपिंग साइट से सीधा वाहनों में लिफ्ट कर ठिकाने लगाया जाता है।
हाल ही में कार्यभार संभाला है। परियोजना के बारे में पता किया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों के साथ जल्द बैठक की जाएगी।
- राकेश शर्मा, डिप्टी सीईओ, स्मार्ट सिटी परियोजना
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