जम्मू-कश्मीर के विभिन्न सिख संगठनों, डीजीपीसी के पूर्व सदस्यों और सिख बुद्धिजीवियों का एक प्रतिनिधिमंडल नेशनल कांफ्रेंस के संभागीय अध्यक्ष देवेंद्र राणा और कानून मंत्री सैफुल्लाह से मिला। इस दौरान उन्होंने वर्ष 2008 से गुरुद्वारा कमेटी चुनाव न करवाने पर रोष जताया।
उन्होंने कहा कि चुनाव न होने से एक गैर सिख (डीसी) गुरुद्वारों का संचालन कर रहा है, जो सिख मर्यादाओं के खिलाफ है और यह उन्हें स्वीकार नहीं है। सिखों ने कहा कि हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 11 जुलाई, 2013 को मोहिंदर सिंह द्वारा दायर याचिका की सुनवाई करते हुए सरकार को जल्द से जल्द चुनाव करवाने को कहा था।
सरकार ने दस जनवरी 2014 को चुनाव करवाने की अधिसूचना भी जारी की थी लेकिन कश्मीर में मौसम अनुकूल न होने का वास्ता देकर चुनाव को स्थगित कर दिया गया था। इस संबंध में कोर्ट की अवमानना का मामला दर्ज होने पर सरकार ने आनन-फानन में 15 सितंबर को चुनाव करवाने की घोषणा कर दी।
साथ ही नौ जुलाई तक जिला का परिसीमन तय करने और 16 जुलाई तक मतदाता सूची फाइनल करने की बात कही लेकिन इस संबंध में अभी तक कुछ नहीं किया गया है। दो दिन पहले अदालत ने इस मामले में सरकार से एक सप्ताह के अंदर अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।
नेकां नेताओं ने इस संबंध में जल्द आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल में सिख यूनाइटेड फ्रंट के अवतार सिंह खालसा, यूथ नेशनल कांफ्रेंस के प्रेसीडेंट सुरिंदर सिंह बंटी, भाई कन्हैया सिंह निष्काम सेवा सोसाइटी, आल इंडिया सिख स्टूडेंट फेडरेशन, सिख वेलफेयर सोसाइटी और सिख नौजवान सभा के प्रतिनिधि शामिल थे।