देश और विदेशो में रहने वाले सिखों की तरह रियासत के सिखों ने भी इस बार दिवाली नहीं मनाई। न घरों और व्यापारिक संस्थानो पर दीपमाला की और न ही आतिशबाजी की।
पिछले दिनों पंजाब में श्री गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी और उनके दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने के विरोध में तमाम सिखों ने इस बार काली दिवाली मनाने का फैसला किया। दिवाली के दिन ही सिख बंदी छोड़ दिवस भी मनाते हैं।
इस दिन गुरुद्वारों में दीपमाला करने के अलावा संध्या के समय मोमबत्तियां लगाकर खुशियां जताई जाती है, लेकिन इस बार गुरुद्वारों में भी न तो रोशनी सज्जा की गई और न ही मोमबत्तियां लगाईं गईं।
हालांकि देर रात तक गुरुद्वारों में माथा टेकने वालों का तांता लगा रहा, लेकिन सब कुछ सादगी के साथ हुआ। इस मौके पर मिठाई लेकर पहुंचने वाले श्रद्धालु सिर्फ माथा टेकने पहुंचे। सिखों ने बताया कि श्री गुरुग्रंथ साहिब उनके जीवित गुरु हैं।
उन्हें फाड़ना या उनकी बेअदबी उन्हें बर्दाश्त नहीं होगी। सिखों में इस बात को लेकर भी रोष है कि पंजाब में अकाली दल की सरकार होने के बावजूद अभी तक दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एक के बाद अन्य घटनाएं भी हुईं। यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। शहर के गुरुनानक नगर गुरुद्वारा, डेरा संत पुरा डन्ना, गांधी नगर गुरुद्वारा, रिहाड़ी गुरुद्वारा सहित तमाम गुरुद्वारों में रोशनी सज्जा नहीं हुई।