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सियाचिन हिमस्खलन में जेसीओ समेत 10 जवान शहीद

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लद्दाख के सियाचिन ग्लेशियर में बुधवार की सुबह हिमस्खलन में दबे सेना के 10 जवानों के शहीद होने की पुष्टि सेना ने की है। सेना के अनुसार हिमस्खलन में दबकर शहीद होने वालों में एक जेसीओ भी शामिल हैं।
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इस बीच लगातार दूसरे दिन भी व्यापक स्तर पर रेस्क्यू आपरेशन चलाया गया। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर जवानों को श्रद्धांजलि दी।

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, 'सियाचिन में जवानों के साथ हुआ हादसा दुखद है, मैं जवानों की बहादुरी को सलाम करता हूं जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दे दी, उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं।'
Demise of soldiers in Siachen is very tragic. I salute the brave soldiers who gave their lives to the nation. Condolences to their families.— Narendra Modi (@narendramodi) February 4, 2016
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सियाचिन में परम बलिदान देने वाले सैनिकों को सलाम: डीएस हुड्डा

वहीं जम्मू संभाग के उधमपुर में स्थित उत्तरी कमांड द्वारा जारी बयान में उत्तरी कमांड के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने हिमस्खलन की घटना में हुए नुकसान को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा कि सेना अपने उन वीर जवानों को सलाम करती है।

जिन्होंने हमारी सीमाओं की रक्षा करने के लिए सभी चुनौतियों का बहादुरी से डटकर मुकाबला करते हुए ड्यूटी के दौरान परम बलिदान प्राप्त किया है।

मद्रास रेजिमेंट के उन 10 जवानों की तलाश दूसरे दिन भी जारी रही, जो बुधवार की सुबह 19, 600 फीट की ऊंचाई पर सियाचिन ग्लेशियर पर आए हिमस्खलन में लापता हुए थे। इसमें खोजी कुत्तों के साथ-साथ विशेष उपकरण भी प्रयोग में लाए गए। लेकिन, मौसम खराब होने और इलाका दुर्गम होने के चलते काफी दिक्कतें आईं।
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दुनिया की सबसे ऊंची रणभूम‌ि है सियाचिन

गौरतलब है कि ग्लेशियर क्षेत्र में दिन के दौरान अधिकतम तापमान मानइस 25 डिग्री, जबकि रात में न्यूनतम तापमान माइनस 42 डिग्री तक जाता है। अब तक किसी भी जवान का नहीं मिलना यह संकेत देता है कि अब उनके जिंदा बचने की उम्मीद नहीं के बराबर है।

सियाचिन ग्लेशियर सबसे ऊंचाई वाला स्थान है। यहां तापमान माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। भारत और पाकिस्तान दोनों द्वारा वर्ष 1984 से अपने सैनिकों को वहां तैनात किया गया है।

भारतीय सेना द्वारा सियाचिन पर एक जवान को केवल 3 महीने के अधिकतम समय तक की तैनाती की अनुमति मिलती है जबकि बाना पोस्ट जैसी दुर्गम और खतरा वाली जगह पर एक जवान अधिकतम 30 दिनों तक ही तैनात रहता है।
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