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श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय में लेना चाहते हैं दाखिला तो पढ़ें ये खबर

Mon, 11 May 2020 12:26 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय - फोटो : सोशल मीडिया
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श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय (एसएमवीडीयू) कटड़ा नए शैक्षिक सत्र में बीबीए शुरू करने जा रहा है। साथ ही सात विषयों में पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रम भी शुरू किया जाएगा। यदि कोई विद्यार्थी स्नातक के बाद डिग्री लेना चाहता है तो उसे इसकी अनुमति होगी।

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विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. रवींद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि सभी पाठ्यक्रमों में दाखिला प्रवेश परीक्षा के आधार पर होगा। इसके लिए तिथि की घोषणा जल्द की जाएगी। विश्वविद्यालय में बीटेक (कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल, सिविल व इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग) आदि में दाखिला विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित प्रवेश परीक्षा या जेईई की रैकिंग के आधार पर होगा। बीआर्क में प्रवेश जेईई की रैकिंग पर होगा।  

इन विषयों में इंटीग्रेटेड कोर्स
विज्ञान- बीएससी (ऑनर्स) बायोटेक्नॉलाजी-एमएससी बायोटेक्नॉलाजी, बीएससी (आनर्स) मैथ्स-एमएससी मैथ्स, बीएससी (ऑनर्स) फिजिक्स-एमएससी फिजिक्स।
कला/मानविकी- बीए (ऑनर्स) अंग्रेजी-एमए अंग्रेजी, बीए (ऑनर्स) दर्शन-एमए दर्शन, बीए (ऑनर्स) अर्थशास्त्र-एमए अर्थशास्त्र

 

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बीटेक, बीआर्क और एमबीए में स्कॉलरशिप

प्रो. सिन्हा ने बताया कि बीटेक, बीआर्क तथा एमबीए के विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप की भी सुविधा होगी। जेईई में 30 हजार तक के रैंक वाले छात्रों की पांच सेमेस्टर की ट्यूशन फीस, 30 से 50 हजार तक के रैंक वाले छात्रों की चार सेमेस्टर और 50 हजार से एक लाख तक के बीच के रैंक वाले विद्यार्थियों के पहले तीन सेमेस्टर की ट्यूशन फीस माफ होगी। साथ ही बीआर्क में जेईई में 500 रैंक वाले छात्रों की पहले पांच सेमेस्टर, 500 से 1500 रैंक वाले छात्रों की पहले चार सेमेस्टर और 1500 से 3000 तक के रैंक वाले छात्रों की पहले तीन सेमेस्टर की ट्यूशन फीस माफ रहेगी।

इसी प्रकार एमबीए में मैट व सीमैट में 90 परसेंटाइल से ऊपर वाले विद्यार्थियों की पहले साल की पूरी ट्यूशन फीस तथा दूसरे साल की 50 फीसदी फीस माफ रहेगी। 85 से 90 परसेंटाइल वालों की पहले साल की तथा 80 से 85 परसेंटाइल वालों की पहले साल की 50 फीसदी ट्यूशन फीस माफ रहेगी।
विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को रोजगारपरक कोर्स कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इंटीग्रेटेड कोर्स की शुरुआत इसी वजह से की गई है ताकि वे एक साथ गुणवत्तापूर्ण स्नातक और परास्नातक की शिक्षा हासिल कर सकें। इसमें छात्रों की सहूलियत का भी ख्याल रखा गया है कि वे चाहें तो स्नातक के बाद अपनी डिग्री ले सकते हैं। इससे पांच साल तक बंधे रहने के विचार से भी मुक्ति मिलेगी। - प्रो. रवींद्र कुमार सिन्हा-वाइस चांसलर, एसएमवीडीयू
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