पंजाब यूनिवर्सिटी में डीएसडब्ल्यू पद को लेकर घमासान होना तय है। इसकी शुरुआत हो चुकी है। सिंडिकेट व सीनेट में जो ग्रुप लीडर हैं उनके बयानों में भी विरोधाभास है। ऐसे में माना जा रहा है कि फिर से यह पद विवादों में आ सकता है। अब देखना है कि वीसी प्रो. राजकुमार इस पर कैसा स्टैंड लेते हैं।
यदि पीयू के कैलेंडर के मुताबिक निर्णय होता है तो उस पर उंगली नहीं उठनी चाहिए और यदि कोई कैलेंडर को दरकिनार कर अपने नियमों को आगे बढ़ाना चाहता है तो फिर संकट खड़ा होगा। पीयू के डीएसडब्ल्यू का पद महत्वपूर्ण होता है। सभी 20 हॉस्टल उनके अधीन होते हैं। इसके अलावा छात्र कल्याण का पूरा कार्य वही देखते हैं।
इस महत्वपूर्ण कुर्सी पर अपने-अपने चेहरे बैठाने की जुगत पहले भी लगाई जाती रही है और अब फिर से शुरू हो गई। नियमों को कहीं तार-तार किया जाता है तो कहीं नियमों की दुहाई दी जाती है। इस पद पर तैनात प्रो. इमैनुअल नाहर 31 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इस पद के लिए एक चेहरा चाहिए जो योग्य हो। डीएसडब्ल्यू योग्यता के अनुसार लगाया जाना चाहिए न कि सीनियोरिटी को देखते हुए। साथ ही यह पद सीधे विद्यार्थियों के हित का होता है। ऐसे में वीसी के साथ बेहतर तालमेल भी जरूरी है। योग्यता के साथ अनुभव भी होना जरूरी है।
इन चेहरों पर नजर
पीयू डीएसडब्ल्यू के पद के लिए प्रो. देविंदर सिंह, प्रो. जतिंदर ग्रोवर, प्रो. हरीश कुमार, डॉ. जगत भूषण आदि नाम सामने आ रहे हैं। योग्यता के मुताबिक यही चेहरे भी फिट बैठते नजर आ रहे हैं। इन नामों में दोनों ग्रुप के लोग हैं जो उन्हें पसंद भी करते हैं और समय-समय पर उनके अनुभव का लाभ भी लेते हैं। सूत्रों का कहना है कि इसमें दो नाम ऐसे हैं जिन पर सहमति बन सकती है, लेकिन उनमें से एक चेहरा फाइनल करना मुश्किल होगा। हालांकि फिर भी चयन तो एक व्यक्ति का करना ही होगा।