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NIT छात्रों में दिखा देशभक्ति का जज्बा, तिरंगा नहीं मिला तो दीवारों पर बनाई तिरंगे की पेंटिंग

Wed, 06 Apr 2016 10:20 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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एनआईटी गेट पर हाथ से त‌िरंगा बनाकर फहराते छात्र - फोटो : NIT छात्रों द्वारा भेजी गई फोटो
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एनआईटी श्रीनगर के छात्रों की देश भक्ति के जज्बे का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि तिरंगा वापस न मिलने पर उन्होंने तिरंगे की बड़ी-बड़ी चित्रकारी कर उसे कैंपस की दीवारों पर चिपका दिया। इस संबंध में फेसबुक में ‘सेव द स्टूडेंट्स आफ एनआईटी श्रीनगर’ में एक पोस्ट डाला गया।
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पोस्ट का मजमून कुछ इस प्रकार है : कल जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से एनआईटी श्रीनगर के बेगुनाह छात्रों पर की गई बेरहम यातना और पुलिस अधिकारियों के झूठे और पक्षपातपूर्ण बयान के मद्देनजर प्रत्येक छात्र ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। इनमें छात्राएं भी शामिल रहीं। बार-बार के आग्रह के बावजूद छात्रों को तिरंगा नहीं लौटाया गया।

उन्होंने देश के गौरव को दर्शाने के लिए तिरंगे की बड़ी-बड़ी चित्रकारी बनाई। हाथ से बने तिरंगों को हास्टल की विशाल दीवारों पर लगा दिया गया। सीआरपीएफ ने जेके पुलिस को कैंपस से बाहर कर दिया और हमें कालेज में खुले दिल से तिरंगा फहराने में मदद की। धन्यवाद। लेकिन सवाल फिर उठता है कि हमें सुरक्षा प्रदान करने के लिए सीआरपीएफ कब तक कैंपस में रहेगी। हम फल खरीदने या डाक्टर के पास बाहर नहीं जा सकते। यह जेल से भी बुरा है।
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बार‌िश के दौरान भी छात्रों का प्रदर्शन जारी

एनआईटी गेट त‌िरंगे के साथ छात्र - फोटो : NIT छात्रों द्वारा भेजी गई फोटो
कालेज प्रशासन के पूरी तरह विफल रहने और सुरक्षा की चिंताजनक स्थितियां को देखते हुए आम मांग हो रही है कि कालेज को सामाजिक और अन्य मामलों में किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया जाए, ताकि छात्र अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर सकें।

जो लोग अभी भी सोचते हैं कि यह विरोध स्थानीय और कश्मीरियों के खिलाफ है, उन्हें हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ऐसा नहीं है। हम कालेज प्रशासन के खिलाफ हैं, जिन्होंने राष्ट्र विरोधी, पत्थरबाजों, लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न कर अन्याय किया।

इतना ही नहीं, बेगुनाह छात्रों के खिलाफ कड़े आदेश जारी किए गए। मीडिया में झूठा बयान दिया गया। मीडिया को परिसर में आने नहीं दिया गया। राष्ट्र विरोधी नारों के लिए स्थानीय लोगों को समर्थन दिया गया। यह उत्पीड़न मानसिक और शारीरिक रूप से असहनीय है। हम हर मौसम (यहां बारिश हो रही है) में शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे हैं।
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