2011 में जब नगरोटा के जगती में कश्मीरी पंड़ित विस्थापितों के लिए टाउन स्थापित किया गया था, तो चार हजार से ज्यादा क्वार्टरों में पानी की सप्लाई पहुंचाने के लिए 14 करोड़ की लागत से वाटर सप्लाई स्कीम तैयार की गई थी। वर्तमान समय में इस स्कीम का पूरा लाभ कश्मीरी विस्थापितों को नहीं मिल रहा है।
विस्थापितों का कहना है कि सप्ताह में तीन दिन ही पानी की सप्लाई मिल रही है। इसके अलावा बारिश के दौरान दूषित पानी की सप्लाई होती है। रिलीफ डिपार्टमेंट के अधिकारी का कहना है कि पानी की परेशानी तब बनती है जब बिजली की सप्लाई प्रभावित होती है।
जगती में चार हजार से ज्यादा क्वार्टर बनाए गए हैं, जिनमें कश्मीरी पंडित विस्थापित परिवार करीब तीन वर्ष से जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इन क्वार्टरों में सबसे बड़ी परेशानी पानी की सप्लाई की है। पानी की सप्लाई के लिए 14 करोड़ की लागत से वाटर सप्लाई स्कीम तैयार की गई थी।
अब यह स्कीम दम तोड़ती नजर आ रही है। जरूरत के अनुसार पानी न मिलने पर 2014 की गर्मियों के मौसम में कश्मीरी विस्थापित परिवारों का ज्यादा समय प्रदर्शन करते हुए ही गुजरा था। कुछ दिनों के बाद फिर से गर्मियां आरंभ हो जाएंगी और फिर से पानी की किल्लत की समस्या गंभीर रूप ले लेगी।
एमएल पंडिता, गोपीनाथ, रमेश भट आदि कश्मीरी विस्थापितों ने बताया कि दिन-प्रतिदिन परेशानी बढ़ रही है, जबकि रिलीफ डिपार्टमेंट इस पर कोई कदम नहीं उठा रहा है। वहीं, रिलीफ डिपार्टमेंट के एईई पीके कौल का कहना है कि पानी की किल्लत की परेशानी बिजली सप्लाई न मिलने के कारण बन रही है। बिजली बंद होने पर पंपिंग और फिल्टर का काम प्रभावित होता है।