कुछ दिनों की राहत के बाद संभाग के ग्रीष्मकालीन जोन के अंतर्गत आने वाले इलाकों में बिजली-पानी की अघोषित कटौती फिर बढ़ गई है। आठ से दस घंटे तक की बिजली कटौती से लोगों का गर्मी में हाल बेहाल हो रहा है। पेयजल के शार्टफाल और बिजली कटौती से पंपिंग में दिक्कत से पानी की आपूर्ति भी चरमरा रही है। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बिजली आपूर्ति पर पेयजल की सप्लाई निर्भर करती है।
तापमान बढ़ने पर बिजली ढांचे पर ओवरलोड बढ़ने से अघोषित कटौती का सिलसिला बढ़ जाता है और इससे पेयजल आपूर्ति पर भी सीधा असर पड़ता है। जम्मू शहर में पेयजल की जरूरतों को पूरा करने के लिए 46 मिलियन गैलन डेली (एमजीडी) की दरकार है, जबकि सरकार पीएचई विभाग के माध्यम से करीब 43 एमजीडी पानी ही उपलब्ध करवा पा रही है। पेयजल की लगातार बढ़ रही मांग को पूरा करने के लिए मौजूदा जल स्रोतों का और प्रयोग करना आसान नहीं है।
सरकार की ओर से जम्मू शहर में बढ़ रही जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए अगले पंद्रह से बीस साल की पेयजल की मांग को पूरा करने के लिए चिनाब पेयजल परियोजना की डीपीआर तो तैयार की है, लेकिन धनराशि के लिए फिलहाल जापान इंटरनेशनल बैंक से लोन मंजूर करने का आग्रह किया गया है। लोन पर ही इस परियोजना का भविष्य टिका हुआ है।