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कठुआ की बेटी ने खोजा सौर ऊर्जा से पानी को शुद्ध करने का फार्मूला

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निरोगी काया को पहला सुख माना गया है। विडंबना यही है कि ज्यादातर लोग इसी सुख से वंचित हैं। जल ही जीवन है। काया को रोगी बनाने का सबसे बड़ा कारण है दूषित पानी। दुनिया की बहुसंख्यक आबादी जल को शोधित करने वाले यंत्रों का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं है।
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ऐसे में सौर ऊर्जा से पानी को शुद्ध करने की तकनीक ईजाद कर इन लोगों को शुद्ध पानी मुहैया कराने का बीड़ा उठाया कठुआ की बेटी शिवाक्षी ने। उसकी यह उपलब्धि लोगों की जिंदगी बदल सकती है।

देश के कई हिस्से ऐसे हैं जहां आज भी स्वच्छ पेयजल सपना है। संसाधनों की कमी के चलते ये लोग आर्सेनिक सहित कई मिश्रित धातुओं से प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं। कठुआ की आम लड़की से दुनिया भर के लिए खास बनने का डा. शिवाक्षी का सफर कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है।
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शिवाक्षी का प्रोजेक्ट चुना गया बेस्ट प्रोजेक्ट

रूस की राजधानी मास्को में पिछले साल अक्तूबर में आयोजित ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में डा. शिवाक्षी सिंह जसरोटिया ने अपने सपने को दुनिया के सामने रखा। जूनियर वैज्ञानिक और रिसर्चर के रूप में डा. शिवाक्षी ने ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लिया।

वहां इनके प्रोजेक्ट को पहला स्थान हासिल हुआ। भारत से इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए चुने गए चार वैज्ञानिकों में से एक डा. शिवाक्षी वैज्ञानिकों को मनवाया कि उनकी सोच से कितना बदलाव आ सकता है।

तभी तो उनके प्रोजेक्ट को बेस्ट प्रोजेक्ट के रूप में ब्रिक्स देशों ने स्वीकार किया। अब ब्रिक्स देश इस आइडिया को हकीकत में बदलने की मुहिम में जुट गए हैं। फरवरी के पहले सप्ताह में ब्रिक्स में भेजे गए डॉ. शिवाक्षी के प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के साथ ही सौर उर्जा से स्वच्छ पेयजल मिलने का सपना पूरा करने की दिशा में एक कदम और रख दिया जाएगा।
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दुन‌िया में र‌ियासत का नाम रोशन कर रही डा. शिवाक्षी

13 अक्तूबर को रूस में हुए सम्मेलन में भारत के अलावा ब्राजील, चीन, रूस, साउथ अफ्रीका और यूरोपीय संघ देशों के जूनियर और सीनियर वैज्ञानिकों ने भाग लिया।

एनर्जी, एग्रीकल्चर, आईटी और हेल्थ विषय पर हर देश के चुनिंदा चार वैज्ञानिकों ने ऐसे कंसेप्ट पेश किए, जो पर्यावरण बदलाव को मात देते हुए अरबों लोगों की जिंदगियों को बदल सकते थे।

इसमें सौर ऊर्जा से पानी में आर्सेनिक सहित अन्य अशुद्धियों को खत्म करने के उनके प्रोजेक्ट को स्वीकार करने के साथ ही सम्मानित भी किया गया है। डा. शिवाक्षी सिंह जसरोटिया दिल्ली की टीआरआई यूनिवर्सिटी से पीएचडी की उपाधि लेने के बाद निरंतर शोधरत हैं।
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