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Jammu News: रियासी में लौटा सामान्य माहौल, कड़ी सुरक्षा के बीच बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या

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सोमवार को शिवखोड़ी में दर्शन उपरांत लौटते श्रद्धालु व गुफा का बाहरी दृश्य।
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शिवखोड़ी आतंकी हमले के एक साल पूरे, प्रतिदिन लगभग दो हजार श्रद्धालु यात्रा के लिए पहुंच रहे
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संवाद न्यूज एजेंसी
पौनी। पिछले साल 9 जून को शिवखोड़ी से कटड़ा जा रही श्रद्धालुओं की बस पर हुए आतंकी हमले के एक वर्ष बाद रियासी जिले में अब माहौल पूरी तरह सामान्य हो गया है, हालांकि अब भी सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त हैं। 9 जून 2024 को हुए इस आतंकी हमले में नौ लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें बस चालक और सह-चालक भी शामिल थे, जबकि 41 यात्री घायल हुए थे।


हमले के बाद क्षेत्र में डर का माहौल बन गया था। शाम ढलते ही यात्री वाहनों की आवाजाही रोक दी जाती थी और रनसू से झंडी मोड़ तक हर वाहन की गहन पड़ताल के बाद ही आगे बढ़ने दिया जाता था। सुरक्षाबलों ने गश्त बढ़ा दी थी और जिला पुलिस के साथ सीआरपीएफ व पुलिस के जवान जगह-जगह तैनात किए गए थे। शिवखोड़ी आने-जाने वाले सभी वाहनों को सुरक्षा घेरे में रखकर ही आने-जाने की अनुमति दी जाती थी।
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जांच जारी, सुरक्षा बढ़ी
इस हमले में राजोरी जिले के सिया गांव के मुख्य आरोपी मददगार हाकम दिन को एनआईए ने हिरासत में लिया था। उनसे पूछताछ की गई थी, लेकिन हमले में शामिल आतंकियों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। हमले के बाद शिवखोड़ी पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में काफी कमी आई थी, लेकिन अब माहौल सामान्य होने के साथ ही श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। प्रतिदिन लगभग दो हजार श्रद्धालु भोले बाबा के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। सीआरपीएफ के जवान अब रात में भी पूरे मार्ग पर गश्त करते हैं, और कटाली मार्ग पर सीआरपीएफ की नई पोस्ट भी बनाई गई है। सुरक्षाबलों की मौजूदगी से श्रद्धालु बेफिक्र होकर यात्रा कर रहे हैं।
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बस चालक विजय कुमार का बलिदान: परिवार को गर्व के साथ गम
जो आतंकी हमले में मारे गए बस चालक रियासी के विजय कुमार के परिवार को आज भी उनकी मौत का गम है, लेकिन उनके बलिदान पर गर्व भी है। आतंकियों के सामने आने पर भी विजय ने बस रोकने की बजाय आगे बढ़ने की कोशिश की। उन्हें गोली लगने से बस खाई में गिर गई, जिससे आतंकियों को सामने से गोली चलाने का मौका नहीं मिला और कई लोगों की जानें बच गईं। विजय कुमार की बरसी कुछ दिन पहले ही हुई। उनके परिजनो ने पाकिस्तान में आतंकियों के खिलाफ हुए ''''ऑपरेशन सिंदूर'''' को सही ठहराया और केंद्र सरकार से आतंकी ठिकानों को पूरी तरह ध्वस्त करने का आग्रह किया। सरकार ने विजय कुमार के परिजनो को आर्थिक मदद और उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी दी है, लेकिन परिवार के मुख्य सदस्य के चले जाने का गम आज भी बना हुआ है।
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