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शम्मी का अजब-गजब कारनामा, मोमबत्ती से चलाया पंखा

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माली हालत ऐसी कि बमुश्किल दो वक्त की रोटी चलती थी। पिछड़े गांव के गरीब कुनबे से एक युवा प्रतिभा ने ऐसी परवाज भरी है कि अब उसे आसमान छूने से रोक पाना मुमकिन नहीं लगता।
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स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद बीटेक में दाखिल लेने वाले शम्मी कुमार ने ऐसे प्रोजेक्ट तैयार कर डाले हैं जिसने तकनीक अनुसंधान के संस्थानों को भी चौंका दिया है।

अदना सी दिखने वाली मोमबत्ती से ऊर्जा बदलकर पांच घंटे लगातार बल्ब और पंखा चलाना हो या फिर घर से दूर रहकर बिजली के उपकरण रिमोट से बंद करने की करामात।

BHEL ने पुरस्कार दिया

शम्मी कुमार ने अपनी तकनीकी दुनिया के ख्वाब हकीकत में बदल दिए हैं। उसने बताया कि पहले प्रोजेक्ट में उसने छोटी सी मोमबत्ती से 1.9 एंपियर की ऊर्जा तैयार की है जिसे बढ़ाया जा सकता है।

इसे इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च मोहाली ने मान्यता दी है।

इस युवा प्रतिभा के प्रोजेक्ट पर भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनी ने जहां बाकायदा नकद पुरस्कार दिया है वहीं शम्मी कुमार को अब केंद्र सरकार के अधीन चलने वाले एक प्रतिष्ठित संस्थान ने शॉर्टलिस्ट किया है।

नोएडा से बीटेक कर रहा है शम्‍मी

रोजमर्रा जिंदगी में बेहद उपयोगी और सस्ती तकनीक के प्रोजेक्ट बनाकर शम्मी कुमार नोएडा स्थित अपने संस्थान में ही नहीं बल्कि इस फील्ड से जुड़े इदारों में भी पहचान बनानी शुरू कर दी है।

कठुआ के नंगल गांव से ताल्लुक रखने वाला शम्मी आठवीं कक्षा में था जब उसके पिता का निधन हो गया था। छोटी सी दुकान के सहारे मां ने शम्मी सहित परिवार को पाला।

जखबड़ के भारतीय पब्लिक स्कूल और बरनोटी के करतार पब्लिक स्कूल से शिक्षा पूरी करने के बाद उसे नोएडा में बीटेक में दाखिल मिल गया। उसके बाद से शम्मी अपनी रचनात्मकता से साथी विद्यार्थियों और स्टाफ को चौंका रहा है।
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'इलेक्ट्रिकल पॉवर ट्रांसफर थ्रू रिमोट'

अमर उजाला से बातचीत में शम्मी कुमार ने बताया कि हाल ही में उसकी प्रतिभा को देखते हुए फ्रांस स्थित मनु टेक फ्रांस इलेक्ट्रॉनिक्स में जाने का अवसर मिला। बहुमूल्य अनुभव लेकर लौटने पर उसे और बेहतर प्रोजेक्ट तैयार करने की प्रेरणा मिली है।

शम्मी कुमार ने बताया कि पहले प्रोजेक्ट की तरह से उसने इलेक्ट्रिकल पॉवर ट्रांसफर थ्रू रिमोट नामक प्रोजेक्ट बनाया जिसमें घर से दूर रहकर बिजली के चलते हुए उपकरणों को बंद किया जा सकता है। इससे बिजली की बचत की जा सकती है।

प्रोजेक्ट पर भेल की ओर से उसे 46 हजार रुपये का नकद पुरस्कार भी मिला है। उल्लेखनीय है कि बीटेक द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी की उम्र बीस वर्ष से भी कम है।
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