जीएमसी में लीकेज की समस्या बढ़ने से कई यूनिट जलमग्न हो रहे हैं। छतों से लगातार टपक रहे पानी से दुर्गंध का आलम है। यही नहीं ग्राउंड लेबल पर छतों से पानी आने से ऊपर पूरी इमारत कमजोर पड़ रही है। ग्राउंड स्तर पर ब्लाक पाइपों को दुरुस्त बनाने के लिए कुछ खास नहीं किया गया है।
मजेदार बात यह है कि पहले फ्लोर पर सेंट्रल स्टरलाइजेशन सप्लाई विभाग से सभी महत्वपूर्ण यूनिटों को स्टरलाइज सप्लाई की जाती है लेकिन यह यूनिट भी दूषित पानी में डूबी रहती है, जिससे सफाई का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर में स्थापित लांडरी यूनिट की सबसे खराब हालत है। यूनिट में लगातार छतों से दूषित पानी का रिसाव हो रहा है। हालत यह है कि यूनिट में मशीनों को पानी से बचाने के लिए पालीथिन और दूसरी चीजों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
लगभग सभी छतों से पानी की लीकेज होने से दीवारों और ग्राउंड स्तर पर शार्ट सर्किट होने की आशंका भी बनी रहती है लेकिन अस्पताल प्रशासन को इससे कोई लेना-देना नहीं है। इससे ऊपर वाले यूनिट सेंट्रल स्टरलाइजेशन सप्लाई विभाग की बात करें तो वहां कर्मियों को सुबह आकर सबसे पहले यूनिट से दूषित पानी को बाहर निकालने का काम करना पड़ता है।
अस्पताल में आपरेशन थियेटर, इमरजेंसी और अन्य दूसरी महत्वपूर्ण यूनिटों में यहीं से स्टरलाइज होकर सामान की सप्लाई होती है। लेकिन कॉरिडोर से अक्सर बाहर सामान ले जाते समय उस पर छतों से लीकेज हो रहा दूषित पानी गिरता रहता है।
अब सवाल यह उठता है कि ग्राउंड स्तर पर छतों से लगातार हो रही लीकेज से इमारत भविष्य में कितनी मजबूत रहेगी। यही हाल ग्राउंड लेबल पर स्थापित कैंसर यूनिट का भी है।