- फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रीज ने टास्क फोर्स के सामने रखी अपनी बात
- कहा - एनओसी में देरी, बार-बार कागज जमा कराने से थक चुके हैं उद्यमी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में उद्योग शुरू करना कारोबारियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। मंजूरी की लंबी प्रक्रिया, कई विभागों से एनओसी लेने की झंझट और बार-बार दस्तावेज जमा कराने जैसी दिक्कतों से उद्यमी परेशान हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रीज जम्मू ने केंद्र सरकार की टास्क फोर्स के सामने अपनी बात रखी।
फेडरेशन के चेयरमैन वीरेन्द्र जैन ने श्रीनगर के सिविल सचिवालय में हुई बैठक में ये बातें उठाईं। इस बैठक में केंद्र सरकार के विशेष सचिव केके पाठक, जम्मू कश्मीर के उद्योग सचिव विक्रमजीत सिंह और निदेशक अरुण मनहास समेत कई अफसर मौजूद थे। फेडरेशन ने कहा कि सरकार भले ही उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं ला रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। एक यूनिट शुरू करने के लिए प्रदूषण, फायर, वन विभाग जैसे कई दफ्तरों से मंजूरी लेनी पड़ती है, जो महीनों तक नहीं मिलती। इससे उद्यमियों को आर्थिक नुकसान होता है।
फेडरेशन ने ये भी कहा कि कुछ विभागों ने बेवजह की चेकलिस्ट बना रखी हैं, जिससे छोटे कारोबारियों को भी बड़े प्रोजेक्ट जैसा कागजी काम करना पड़ता है। कभी परिवार के अंदर जमीन के नाम बदलने पर भी दोबारा पूरे कागज जमा कराने पड़ते हैं। मंजूरी देने की जो समयसीमा तय की गई है, उस पर अमल नहीं हो रहा। इसके चलते निवेश करने वाले लोग हताश हो रहे हैं।
फेडरेशन ने सरकार से मांग की है कि मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाया जाए। बेमतलब के नियम हटाए जाएं और हर विभाग को तय समय में काम पूरा करने की जिम्मेदारी दी जाए। साथ ही, ऑनलाइन सिस्टम को और मजबूत किया जाए ताकि लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। फेडरेशन की ओर से साफ कहा गया कि अगर ये सुधार नहीं किए गए तो जम्मू कश्मीर में उद्योग लगाना और चलाना दोनों ही मुश्किल होता जाएगा।