अफजल गुरु की पांचवीं बरसी पर शुक्रवार को घाटी में बंद रहा। कई क्षेत्रों में लोगों ने प्रदर्शन किया और छिटपुट घटनाएं भी हुईं। डाउन टाउन क्षेत्र में हुर्रियत ने मार्च निकालने का प्रयास किया, जिसे विफल कर दिया गया। सोपोर में हुर्रियत के मार्च के कारण प्रशासन ने प्रतिबंध लगाया।
डाउन टाउन में जुमे की नमाज नहीं हो पाई। रेल सेवाएं भी प्रशासन ने स्थगित की थी। अफजल की बरसी पर ज्वाइंट रसीसटेंस लीडरशिप ने घाटी में बंद का आह्वान किया था। खानयार, करालखुड, महाराज गुंज, मायसूमा, नौहट्टा, रैनावाड़ी और सफाकदल में प्रशासन ने धारा 144 लगा दी थी।
अफजल के पैतृक गांव सोपोर में सबसे अधिक सुरक्षा की गई। कुछ लोगों ने प्रतिबंध का उल्लंघन करने का प्रयास किया, जिसे पुलिस ने असफल बना दिया। अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और मोहम्मद यासीन मलिक ने रैली निकालने का प्रयास किया।
बंद के कारण घाटी में सभी दुकानें, कारोबारी इदारे, आदि बंद रहे और यातायात भी नहीं के बराबर देखने को मिला। उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के सोपोर के साथ साथ दक्षिणी कश्मीर के कुछ इलाकों में भी पाबंदियां लागू की गयी थी ताकि स्थिति से निपटा जा सके।
इस बीच अलगाववादी नेताओं पे भी शिकंजा कसा गया था। मोहम्मद यासीन मलिक को श्रीनगर सेंट्रल जेल ले जाया गया था जबकि सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाईज सहित अन्य कई नेताओं को घरों में नजरबंद रखा गया था। इस बीच युवाओं द्वारा सोपोर में प्रदर्शन किया गया।
जिसे नियंत्रण में करने के लिए सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोले दागे। वहीं, लोगों ने काफी संख्या में अफजल के पैतृक गांव जागीर घात में भी आयोजित प्रदर्शन में भाग लिया और उसकी अस्थियाँ लौटाने की मांग की गयी। इसके इलावा श्रीनगर के नवाकदल इलाके में भी सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों की बीच भीषण भिड़ंत हुई।
उन्हें तितर बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। मिली जानकारी के अनुसार प्रदर्शनकारियों आतंकी संगठन लश्कर-ए-तोइबा के झंडे भी फहराये और साथ ही अबू दुजाना, जाकिर मूसा, नवीद, आदि आतंकियों के पोस्टर भी दिखाए गए।