पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद और एयरफोर्स अधिकारियों की हत्या के बहुचर्चित मामले में बुधवार को टाडा कोर्ट में आरोपी यासीन मलिक की पेशी नहीं हो सकी। कोर्ट ने एक अक्तूबर तक इस केस पर सुनवाई को स्थगित कर दिया। साथ ही अन्य आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट किए।
अगली तारीख पर यासीन सहित अन्य को कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए गए हैं। बुधवार को जम्मू कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट के अध्यक्ष यासीन मलिक को टाडा कोर्ट में पेश होना था। हालांकि कोर्ट की तरफ से यह कारण नहीं बताया गया कि यासीन क्यों पेश नहीं हुआ।
प्र्रिसाइडिंग अफसर सुभाष चंद्र गुप्ता ने यह आदेश दिया। इसके अलावा शौकत बक्षी, मोहम्मद रफीक, जावेद अहमद मीर, मंजूर अहमद सोफी, जावेद अहमद जरगर, मीर रफीक पहलू, वजाहत बशीर, मंजूर अहमद, मेहराजुद्दीन, जमन मीर के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करते हुए अगली तारीख पर कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया। 1990 में एयरफोर्स के पांच जवानों की श्रीनगर में आतंकियों ने हत्या कर दी थी। इस केस में शामिल अलगाववादी नेता यासीन मलिक अब तिहाड़ जेल में हैं।
इस केस का ट्रायल जम्मू के टाडा कोर्ट में चल रहा है। 1990 से जमानत पर चल रहे यासीन मलिक को कुछ महीने पहले ही पकड़ा गया था। यासीन को एनआईए ने टेरर फंडिंग मामले में भी पकड़ा था। यासीन को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जज के सामने पेश किया जाना था। 25 जनवरी 1990 को श्रीनगर शहर में यह वारदात हुई थी। 1989 में पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद के अपहरण मामले में भी यासीन का नाम शामिल है। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है।
सीबीआई की ओर से 1990 में ही दो मामलों का चालान पेश किया जा चुका है। 1995 में यासीन ने इस मामले की सुनवाई पर रोक लगाने की याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया था। 2008 में यासीन ने इस मामले की सुनवाई को जम्मू से श्रीनगर शिफ्ट करने की याचिका भी दायर की थी। लेकिन अप्रैल 2019 में सीबीआई ने यासीन की याचिका को चुनौती दी जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया।