अलगाववादी नेता मर्सरत आलम को एनआईए ने गिरफ्तार कर दस दिन की पुलिस रिमांड पर ले लिया है। मसरत को रातों रात एनआईए की टीम जम्मू की अंबफला जेल से दिल्ली लेकर पहुंच गई। हाफिज को 2015 में कश्मीर में अलगाववादियों की रैली में लगे पाकिस्तान और हाफिज सईद के फेवर में नारे लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, इस समय मर्सरत अंबफला जेल में पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत बंद था।
सोमवार को एनआईए की टीम ने पहले कोर्ट से अनुमति ली और फिर इसके बाद मर्सरत को गिरफ्तार करने का वारंट लेकर अंबफला जेल पहुंच गए। यहां रात करीब 11 बजे मर्सरत को पकड़ लिया और उसे दिल्ली ले जाया गया।
जानकारी के अनुसार 2015 में मर्सरत आलम ने श्रीनगर में अलगाववादियों की जनसभा में 'हाफिज सईद का क्या पैगाम, कश्मीर बनेगा पाकिस्तान, गिलानी साहब का क्या पैगाम, कश्मीर बनेगा पाकिस्तान, मेरी जान मेरी जान पाकिस्तान पाकिस्तान, तेरा मेरा क्या अरमान, कश्मीर बनेगा पाकिस्तान।' का नारा लगाय था। इसके बाद मर्सरत के खिलाफ जिला प्रशासन ने पीएसए लगा दिया था और उसे जम्मू के अंबफला में रखा गया था।
चार साल बाद दर्ज हुआ केस
मर्सरत आलम पर अचानक इस मामले में केस दर्ज करने और एनआईए के हिरासत में लेकर दिल्ली ले जाने की वजह सामने हैं। इनमें एक वजह अमित शाह का गृह मंत्री बनना है। अमित शाह का अलगाववादियों और आतंकवादियों के खिलाफ कड़ा रुख ही है कि चार साल के बाद अब केस दर्ज हुआ। सूत्रों का कहना है कि मर्सरत से पूछताछ में हाफिज सईद के खिलाफ कई जानकारियां मिल सकती हैं।
कई और भी नपेंगे
सूत्रों का कहना है कि एनआईए ने जेलों में बंद कई अलगाववादियों और पत्थरवाजों की कुंडली तैयार कर ली है। जो लोग पीएसए के तहत बंद हैं, उनके खिलाफ एनआईए केस दर्ज करने के बाद उनसे पूछताछ कर सकती है। उनको दिल्ली ले जाने की तैयारी की जा रही है।