पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा (फाइल फोटो)।
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उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और पंचायत प्रतिनिधियों की सुरक्षा व्यवस्था जल्दी ही और पुख्ता की जाएगी। इसके लिए कुछ कदम उठाए जा चुके हैं, कुछ और उठाए जाएंगे। हालांकि प्रतिनिधियों को खुद भी ऐहतियात बरतनी होगी। बुधवार को सिन्हा ने उप राज्यपाल का पद संभालने के बाद पहली बार अपने सार्वजनिक संबोधन में यह आश्वासन दिया।
शेर-ए-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में पंचायतों और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि हाल ही में कश्मीर घाटी में हमने कई राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और पंचायत प्रतिनिधियों को खो दिया है। आतंकियों ने उनकी हत्या कर दी। हमारी सहानुभूति उनके परिवारों के साथ है। प्रशासन हमेशा उनके साथ खड़ा है। हम पंचायत प्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए और बेहतर प्रबंध करेंगे। साथ ही हमें सुरक्षा की रणनीति बनाते समय और सतर्क रहना होगा।
उप-राज्यपाल ने कहा कि उनकी अगुवाई में प्रशासन प्रदेश के लोगों के सम्मानजनक और शांतिपूर्ण जीवन को सुनिश्चित करने और बेहतर माहौल बनाने के लिए बातचीत शुरू करेगा। बिना किसी भेदभाव के लिए जम्मू-कश्मीर का विकास होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने मुझे प्रदेश का विकास तेजी से करने के लिए कहा है। इसके लिए जमीनी स्तर पर प्रयास करने की जरूरत है।
पंचायती राज कानून यहां सबसे ज्यादा सशक्त
सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पंचायत राज कानून देश के अन्य राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में ज्यादा बेहतर और मजबूत हैं। जब हम बदलाव की बात करते हैं तो पहले खुद को बदलने की जरूरत होती है। जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र फले-फूले इसके लिए हम सबको मिलकर काम करना होगा।
विकास कार्यों पर काफी टेबल बुक का विमोचन
उप राज्यपाल ने एक साल में जम्मू-कश्मीर में विकास की उपलब्धियां बताने वाली काफी टेबल बुक का विमोचन किया। इस अवसर पर कोरोना योद्धाओं, पंचायत और स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया गया।
एक माह में भाजपा के चार नेताओं की हत्या हुई
पिछले एक महीने में आतंकियों ने घाटी में भाजपा के चार पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया है। जुलाई में बांदीपोरा के भाजपा के जिलाध्यक्ष वसीम बारी, उनके पिता और भाई की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। भाजपा के एक पंच को 4 अगस्त को गोली मारकर घायल कर दिया गया, जबकि दो दिन बाद कुलगाम में पार्टी के एक सरपंच की गोली मारकर हत्या कर दी गई। 9 अगस्त को बडगाम जिले में आतंकियों ने भाजपा के एक अन्य कार्यकर्ता को गोली मार दी थी, जिसकी एक दिन बाद मौत हो गई थी।