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Jammu: 15 दिन पहले ही रची गई थी फरारी की साजिश, CCTV तोड़कर सिस्टम को दी थी चुनौती, कैसे चकमा देकर भागे बंदी?

Wed, 18 Feb 2026 11:31 AM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

जम्मू के आरएस पुरा स्थित बाल सुधार गृह से बंदियों की फरारी की साजिश 15 दिन पहले हुई मारपीट और सीसीटीवी तोड़फोड़ से शुरू हुई थी, लेकिन प्रशासन ने चेतावनी के बावजूद सुरक्षा कड़ी नहीं की। घटना के बाद दो एएसआई समेत 10 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं और फरार बंदियों के गैंग कनेक्शन की जांच जारी है।
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बाल सुधार गृह के पास के मैदान में सुरक्षा के नहीं इंतजाम। सीसीटीवी भी नहीं है। - फोटो : अमर उजाला
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जम्मू के आरएस पुरा स्थित बाल सुधार गृह से बंदियों के भागने की सनसनीखेज वारदात कोई अचानक हुई घटना नहीं है। जांच में सामने आया है कि इस बड़ी साजिश की शुरुआत 15 दिन पहले ही हो चुकी थी। 15 दिन पहले ही यहां बंदियों के बीच बीच हिंसक झड़प हुई थी। उस दौरान सुनियोजित तरीके से कुछ महत्वपूर्ण स्थानों के सीसीटीवी कैमरे तोड़े गए थे।

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यह झड़प सिस्टम के लिए अलार्म था लेकिन चेतावनी के बाद भी प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और जरूरी कदम नहीं उठाए। सूत्रों के अनुसार 15 दिन पहले हुई तोड़फोड़ की जानकारी संबंधित अधिकारियों व पुलिस को थी। उसी समय सुरक्षा घेरा सख्त होना चाहिए था, सीसीटीवी ठीक कराए जाने चाहिए थे लेकिन रामभरोसे निगरानी व्यवस्था के चलते हालात जस के तस रहे। बाल गृह के अंदर कुछ ही सीसीटीवी चालू हालात में है। इस घटना के बाद भी सुधार गृह की सुरक्षा नहीं बढ़ाई गई।

सुधार गृह में तैनात कर्मचारियों ने कहा कि यहां मौजूद कई बंदियों की आयु अब 18 साल से ऊपर है। उनकी शारीरिक बनावट ऐसी है कि निहत्थे उनके साथ रहना खतरे से खाली नहीं है। वारदात के बाद जब सुरक्षा चूक सामने आई तो प्रशासन की नींद टूटी। अब डैमेज कंट्रोल शुरू करते हुए सुधार गृह की सुरक्षा बढ़ाई है।
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अधिकारियों के मुताबिक, अब मौके पर दो एएसआई समेत 10 पुलिसकर्मियों का पहरा बैठा दिया गया है। मुख्य प्रवेश द्वार और पिछली दीवारों पर पहले सन्नाटा रहता था वहां अब गश्त बढ़ा दी गई है। मुलाकातों की प्रक्रिया जो अब तक ढीली थी उसकी भी समीक्षा शुरू हो गई है। सुरक्षा एजेंसियां अब इस जांच में जुटी है कि 15 दिन पहले सीसीटीवी तोड़ना का लिंक फरारी से तो नहीं है।

आपसी झगड़ा भी सुनियोजित साजिश थी
सूत्रों ने बताया कि सोमवार को बाल सुधार गृह में तीनों का आपसी झगड़ा भी सुनियोजित साजिश का हिस्सा था। जब एसपीओ विनय चौधरी ने हस्तक्षेप कर स्थिति को शांत करने का प्रयास किया तो तीन नाबालिगों ने अचानक हमला कर दिया। पहले उन्होंने वहां पड़े तवे के हैंडल से पुलिस कर्मी पर हमला किया और इसके बाद फायर किया।

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आरएस पुरा में बाल सुधार गृह के पास उगी झाड़ियां। - फोटो : अमर उजाला
काफी समय से खौफ गैंग से जुड़ा है गुग्गा
बाल सुधार गृह से फरार करणजीत सिंह उर्फ गुग्गा पर पहले ही पांच मामले दर्ज हैं। वह पहले भी यहां रखा जा चुका है। अन्य मामलों में वह जमानत पर था। बताया जा रहा है कि वह काफी समय से खौफ गैंग से जुड़ा है। यहां रहने के दाैरान पाकिस्तान के युवकों से गहरी दोस्ती हो गई। बाल सुधार गृह में नियुक्त पुलिस कर्मियों को हथियार साथ रखने की अनुमति नहीं है। यही नहीं, पुलिस कर्मियों के रात के समय रहने के लिए अलग कमरों की व्यवस्था भी नहीं है।

आरएस पुरा बाल सुधार गृह के पीछे टूटी दीवार। - फोटो : अमर उजाला
गेट पर सुरक्षा के चाक-चाैबंद... पीछे खंडहर और झाड़ियां उड़ा रहीं मखौल
आरएस पुरा में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज सात किलोमीटर दूर स्थित बाल सुधार गृह... मुख्य गेट से देखने पर सब चाक-चौबंद नजर आता है। ऊंची दीवारें हैं। सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और गेट पर सुरक्षाकर्मी मुस्तैद हैं लेकिन जैसे ही आप इस परिसर के पीछे की ओर जाते हैं कहानी पूरी तरह बदल जाती है।

सुधार गृह की दीवार से सटा खंडहर और घनी झाड़ियां सुरक्षा व्यवस्था का मखौल उड़ा रही हैं। वहां पड़ी बीयर की बोतलें और शराब के कैन साफ गवाही दे रहे हैं कि यह अपराधियों और संदिग्धों का अड्डा बन चुका है। इस परिसर के पीछे घनी झाड़ियां दीवारों से सटी हैं। इनकी आड़ लेकर कोई भी खिड़की तक पहुंच सकता है। पिस्तौल या तेजधार हथियार सुधार गृह के अंदर पहुंचाना कोई बड़ी मुश्किल नहीं है।

इस केंद्र में गंभीर अपराध में लिप्त किशोरों और सीमा पार से घुसपैठ कर आए नाबालिगों को रखा जाता है ताकि यहां रहकर उनमें सुधार हो सके। आरएस पुरा मुख्य बाजार से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित इस केंद्र में धारदार हथियार और पिस्तौल का पहुंच जाना सुरक्षा व्यवस्था की परतें खोल रहा है। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच तेज कर दी है जबकि स्थानीय लोग इसे गंभीर लापरवाही मान रहे हैं। सुरक्षा चूक ने प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में ला दिया है।

वारदात से पहले यहां छह पुलिसकर्मी तैनात थे। इनमें से एक समय में तीन ही ड्यूटी पर रहते थे। ऐसे में बाहरी निगरानी भी राम भरोसे थी। सुधार गृह के पिछली दीवार कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है और ऊंचाई भी पर्याप्त नहीं है। पीछे की ओर सीसीटीवी कवरेज नहीं है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की गतिविधि से सुरक्षाबल अनजान रहते हैं।

आरएस पुरा बाल सुधार गृह के पीछे की दीवार। - फोटो : अमर उजाला
घुसपैठियों और अपराधियों की साठगांठ गंभीर खतरे का संकेत
बाल सुधार गृह जैसे संवेदनशील भवन में सीमा पार से आए किशोर घुसपैठिये और स्थानीय कुख्यात अपराधियों के बीच साठगांठ सुरक्षा तंत्र के लिए गंभीर खतरे का संकेत है। प्रारंभिक जांच में इस बात की आशंका जताई जा रही है कि बाहरी नेटवर्क ने अंदर तक पहुंच बनाकर मदद की हो सकती है। ऐसे केंद्र में बंद बंदियों तक पहुंच, मुलाकातों के दौरान ढिलाई और निगरानी की कमी आपराधिक गठजोड़ को जन्म दे सकती है। यदि बाहरी तत्वों ने हथियार या अन्य सामग्री पहुंचाने में भूमिका निभाई है तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि संगठित समन्वय का मामला भी हो सकता है।
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करणजीत से मिलने आ रहे थे संदिग्ध
बाल सुधार गृह से भागे कैदियों की जांच की सुई अब एक गहरी साजिश की ओर घूम रही है। सुधार गृह के एक कर्मचारी दबी जुबान में स्वीकार किया है कि पिछले कुछ हफ्तों से बंदी करणजीत सिंह से मिलने संदिग्ध लोग आ रहे थे। हर बार नया चेहरा, हर बार नई पहचान। सवाल यह है कि संवेदनशील जोन में बिना वेरिफिकेशन के ये मुलाकातें कैसे हो रही थीं।

जिस परिसर में समाज कल्याण विभाग और अनाथ आश्रम भी चलते हैं वहां से बंदियों का इस तरह गायब हो जाना बिना अंदरूनी मदद के असंभव लगता है। सुधार गृह के मुख्य गेट पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। लाखों रुपये खर्च कर लगाए कैमरे जांच में बेकार साबित हुए। गेट पर लगे कैमरे की एंगल सामने की बजाय बाईं दिशा में था। ऐसे में बंदी जिस रास्ते से भागे हैं उसका कोई सीसीटीवी फुटेज ही नहीं है।

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