आरएस पुरा में बाल सुधार गृह के पास उगी झाड़ियां।
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काफी समय से खौफ गैंग से जुड़ा है गुग्गा
बाल सुधार गृह से फरार करणजीत सिंह उर्फ गुग्गा पर पहले ही पांच मामले दर्ज हैं। वह पहले भी यहां रखा जा चुका है। अन्य मामलों में वह जमानत पर था। बताया जा रहा है कि वह काफी समय से खौफ गैंग से जुड़ा है। यहां रहने के दाैरान पाकिस्तान के युवकों से गहरी दोस्ती हो गई। बाल सुधार गृह में नियुक्त पुलिस कर्मियों को हथियार साथ रखने की अनुमति नहीं है। यही नहीं, पुलिस कर्मियों के रात के समय रहने के लिए अलग कमरों की व्यवस्था भी नहीं है।
आरएस पुरा बाल सुधार गृह के पीछे टूटी दीवार।
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गेट पर सुरक्षा के चाक-चाैबंद... पीछे खंडहर और झाड़ियां उड़ा रहीं मखौल
आरएस पुरा में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज सात किलोमीटर दूर स्थित बाल सुधार गृह... मुख्य गेट से देखने पर सब चाक-चौबंद नजर आता है। ऊंची दीवारें हैं। सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और गेट पर सुरक्षाकर्मी मुस्तैद हैं लेकिन जैसे ही आप इस परिसर के पीछे की ओर जाते हैं कहानी पूरी तरह बदल जाती है।
सुधार गृह की दीवार से सटा खंडहर और घनी झाड़ियां सुरक्षा व्यवस्था का मखौल उड़ा रही हैं। वहां पड़ी बीयर की बोतलें और शराब के कैन साफ गवाही दे रहे हैं कि यह अपराधियों और संदिग्धों का अड्डा बन चुका है। इस परिसर के पीछे घनी झाड़ियां दीवारों से सटी हैं। इनकी आड़ लेकर कोई भी खिड़की तक पहुंच सकता है। पिस्तौल या तेजधार हथियार सुधार गृह के अंदर पहुंचाना कोई बड़ी मुश्किल नहीं है।
इस केंद्र में गंभीर अपराध में लिप्त किशोरों और सीमा पार से घुसपैठ कर आए नाबालिगों को रखा जाता है ताकि यहां रहकर उनमें सुधार हो सके। आरएस पुरा मुख्य बाजार से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित इस केंद्र में धारदार हथियार और पिस्तौल का पहुंच जाना सुरक्षा व्यवस्था की परतें खोल रहा है। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच तेज कर दी है जबकि स्थानीय लोग इसे गंभीर लापरवाही मान रहे हैं। सुरक्षा चूक ने प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में ला दिया है।
वारदात से पहले यहां छह पुलिसकर्मी तैनात थे। इनमें से एक समय में तीन ही ड्यूटी पर रहते थे। ऐसे में बाहरी निगरानी भी राम भरोसे थी। सुधार गृह के पिछली दीवार कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है और ऊंचाई भी पर्याप्त नहीं है। पीछे की ओर सीसीटीवी कवरेज नहीं है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की गतिविधि से सुरक्षाबल अनजान रहते हैं।
आरएस पुरा बाल सुधार गृह के पीछे की दीवार।
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घुसपैठियों और अपराधियों की साठगांठ गंभीर खतरे का संकेत
बाल सुधार गृह जैसे संवेदनशील भवन में सीमा पार से आए किशोर घुसपैठिये और स्थानीय कुख्यात अपराधियों के बीच साठगांठ सुरक्षा तंत्र के लिए गंभीर खतरे का संकेत है। प्रारंभिक जांच में इस बात की आशंका जताई जा रही है कि बाहरी नेटवर्क ने अंदर तक पहुंच बनाकर मदद की हो सकती है। ऐसे केंद्र में बंद बंदियों तक पहुंच, मुलाकातों के दौरान ढिलाई और निगरानी की कमी आपराधिक गठजोड़ को जन्म दे सकती है। यदि बाहरी तत्वों ने हथियार या अन्य सामग्री पहुंचाने में भूमिका निभाई है तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि संगठित समन्वय का मामला भी हो सकता है।
करणजीत से मिलने आ रहे थे संदिग्ध
बाल सुधार गृह से भागे कैदियों की जांच की सुई अब एक गहरी साजिश की ओर घूम रही है। सुधार गृह के एक कर्मचारी दबी जुबान में स्वीकार किया है कि पिछले कुछ हफ्तों से बंदी करणजीत सिंह से मिलने संदिग्ध लोग आ रहे थे। हर बार नया चेहरा, हर बार नई पहचान। सवाल यह है कि संवेदनशील जोन में बिना वेरिफिकेशन के ये मुलाकातें कैसे हो रही थीं।
जिस परिसर में समाज कल्याण विभाग और अनाथ आश्रम भी चलते हैं वहां से बंदियों का इस तरह गायब हो जाना बिना अंदरूनी मदद के असंभव लगता है। सुधार गृह के मुख्य गेट पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। लाखों रुपये खर्च कर लगाए कैमरे जांच में बेकार साबित हुए। गेट पर लगे कैमरे की एंगल सामने की बजाय बाईं दिशा में था। ऐसे में बंदी जिस रास्ते से भागे हैं उसका कोई सीसीटीवी फुटेज ही नहीं है।
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