कश्मीर में शीतकालीन छुट्टियों के बाद सभी स्कूल खुल गए हैं। सेना ने आर्मी गुडविल स्कूलों के आस पास सुरक्षा दायरे को औमजबूत कर दिया है ताकि पेशावर जैसे आतंकी हमले से बचाया जा सके। क्यूआरटी का गठन कर विशेष निर्देश दिए गए हैं।
सैन्य सूत्रों के अनुसार, स्कूलों के आसपास मौजूद कंपनियों को सतर्कता बरतने के आदेश दिए गए हैं। सेना की क्विक रिएक्शन टीमों (क्यूआरटी) को किसी भी घटना की जवाबी कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
सेना के एक अधिकारी ने बताया कि सभी गुडविल स्कूलों पर पैनी नजर रखी जा रही है। खासकर जो सैन्य कैंपों से दूरी पर स्थित हैं। अधिकारी के अनुसार, न सिर्फ गुडविल स्कूलों बल्कि देहातों में अन्य सरकारी स्कूलों पर भी सेना की कड़ी नजर है ताकि बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।
सैन्य सूत्रों ने बताया कि पेशावर हमलों को ध्यान में रखते हुए स्कूलों के आसपास की सुरक्षा बढ़ाने का फैसला उच्च स्तर पर लिया गया है।
घाटी में स्कूलों को आतंकी धमकियां
इस संबंध में एक टीम ने कई स्कूलों का दौरा कर सुरक्षा की समीक्षा भी की। एक और सेना अधिकारी के अनुसार, घाटी में आतंकी धमकियों के बावजूद इन स्कूलों में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है।
सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों को जांचने के लिए घाटी के कई स्कूलों में छात्रों के साथ मिलकर मॉक ड्रिल भी आयोजित की गई। दक्षिणी कश्मीर स्थित आर्मी गुडविल स्कूल पहलगाम के प्रशासनिक अधिकारी जावेद इकबाल ने बताया कि स्कूलों में इसे लेकर मॉक ड्रिल भी की गई है।
उन्होंने बताया कि आर्मी गुडविल स्कूल पहलगाम घाटी का एक मात्र बोर्डिंग स्कूल है। पेशावर हमले के बाद स्कूल प्रबंधन किसी प्रकार का खतरा नहीं उठाना चाहता। इकबाल के अनुसार, स्कूल के आसपास और बंकर खड़े किए गए हैं। सुरक्षा के लिहाज से सभी कमियों को दूर करने का पूरा प्रयास किया गया है। इस समय स्कूल में 350 छात्र पढ़ रहे हैं।
गौरतलब है कि कश्मीर घाटी में करीब 40 आर्मी गुडविल स्कूल हैं। जिनमें दस हजार से अधिक बच्चे शिक्षा हासिल कर रहे हैं। इन स्कूलों का संचालन उस इलाके की स्थानीय सैन्य कंपनी करती है, लेकिन घाटी के सभी स्कूल सेना की 15वीं कोर की देखरेख में आते हैं, जो इनके संचालन का ध्यान रखती है।